हनुमानगढ़ में शुरू हुआ राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण का 81वां दौर, प्रवासन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का होगा आकलन
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रवासन (माइग्रेशन) के कारणों और लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस) के 81वें दौर की शुरुआत हो गई है। यह सर्वेक्षण जुलाई 2026 से जून 2027 तक जिले के चयनित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चार चरणों में आयोजित किया जाएगा।
इस सर्वेक्षण का उद्देश्य लोगों के रोजगार, शिक्षा, आय, जीवन स्तर और एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन के कारणों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाना है। इसके आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकेंगी।
अधिकारियों के अनुसार, सर्वे के दौरान चयनित परिवारों से प्रशिक्षित सर्वेक्षक विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से जुड़े सवाल पूछेंगे। इसमें परिवार के सदस्यों की शिक्षा, रोजगार, आय के स्रोत, रहने की स्थिति, सरकारी योजनाओं का लाभ और प्रवासन से जुड़े कारणों की जानकारी एकत्र की जाएगी।
यह सर्वेक्षण जिले के चयनित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चार चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रत्येक चरण में निर्धारित नमूना परिवारों का चयन कर उनसे जानकारी जुटाई जाएगी। सर्वे के लिए आधुनिक डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा, ताकि आंकड़ों का संकलन अधिक सटीक और पारदर्शी तरीके से हो सके।
प्रशासन ने चयनित परिवारों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण दल को सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे में दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासन के कारणों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का सही आकलन होने से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को जमीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए बेहतर नीति निर्माण संभव होगा।
प्रशासन ने लोगों से सर्वेक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा है कि उनकी सहभागिता से जुटाए गए आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
