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डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सुरक्षित रक्तदान पर कार्यशाला

 
डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सुरक्षित रक्तदान पर कार्यशाला

जिले के डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गुरुवार को हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और सुरक्षित रक्तदान विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्घाटन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेंद्र डामोर ने किया।

कार्यक्रम में जिले के डॉक्टर, नर्सिंग कर्मी और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के अन्य प्रतिनिधियों को इन रक्त संबंधी रोगों और सुरक्षित रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

डॉ. महेंद्र डामोर ने उद्घाटन अवसर पर कहा कि हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों का सही समय पर निदान और उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि सुरक्षित रक्तदान न केवल मरीजों की जीवन रक्षा में सहायक है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य और मानवता की भावना को भी बढ़ावा देता है।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान और तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को इन रोगों की पहचान, उपचार प्रक्रिया और रक्तदान की सुरक्षा मानक के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने रोगियों के केस स्टडीज और अनुभव साझा किए, जिससे प्रायोगिक ज्ञान को और बढ़ावा मिला।

कार्यशाला में यह भी जोर दिया गया कि रक्तदान करते समय स्वच्छता, रक्त परीक्षण और सही प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। इसके साथ ही डॉक्टरों ने नए उपकरणों और तकनीकों के बारे में भी जानकारी साझा की, जो इन रोगों के निदान और उपचार को सुगम और प्रभावी बनाते हैं।

एक वरिष्ठ नर्स ने कहा, “इस कार्यशाला ने हमें सिकिल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के निदान और उपचार की सही जानकारी दी। साथ ही सुरक्षित रक्तदान के महत्व को समझने का अवसर भी मिला।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्यशालाएं स्वास्थ्यकर्मियों के प्रोफेशनल विकास के साथ-साथ आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ाने में सहायक होती हैं। इसके माध्यम से रक्त संबंधी रोगों का समय पर इलाज और सुरक्षित रक्तदान की प्रक्रिया को सामाजिक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयोजित यह एक दिवसीय कार्यशाला न केवल स्वास्थ्यकर्मियों के लिए शिक्षाप्रद रही, बल्कि समाज में सुरक्षित रक्तदान और रक्त संबंधी बीमारियों की जानकारी फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई। डॉ. महेंद्र डामोर और अन्य विशेषज्ञों ने इस पहल को आगे बढ़ाने और नियमित रूप से स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।