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डूंगरपुर में इस बार ST ओपन रहेगा जिला प्रमुख का पद, 37 जिला परिषद वार्डों की आरक्षण लॉटरी सितंबर में

 
डूंगरपुर में इस बार ST ओपन रहेगा जिला प्रमुख का पद, 37 जिला परिषद वार्डों की आरक्षण लॉटरी सितंबर में

डूंगरपुर में जिला परिषद चुनाव को लेकर आरक्षण की तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। इस बार जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जनजाति यानी ST के लिए आरक्षित रहेगा, लेकिन पिछले चुनाव की तुलना में बड़ा बदलाव किया गया है। पिछली बार जिला प्रमुख का पद ST महिला के लिए आरक्षित था, जबकि इस बार ST ओपन श्रेणी से जिला प्रमुख चुना जाएगा।

इस बदलाव के बाद अब अनुसूचित जनजाति वर्ग के महिला और पुरुष दोनों दावेदार जिला प्रमुख पद के लिए चुनावी मैदान में उतर सकेंगे। इससे जिले की राजनीति में कई नए समीकरण बनने की संभावना है। राजनीतिक दल भी अब संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज कर सकते हैं।

डूंगरपुर जिले में आदिवासी आबादी बड़ी संख्या में है और जिला प्रमुख का पद ST के लिए आरक्षित होने के कारण इस पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। पिछले चुनाव में ST महिला आरक्षण के चलते महिला उम्मीदवारों को अवसर मिला था। इस बार ओपन आरक्षण होने से दावेदारों का दायरा बढ़ गया है।

वहीं जिला परिषद के 37 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी पहले प्रस्तावित तारीखों पर नहीं होगी। राज्य सरकार की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी प्रक्रिया स्थगित किए जाने के बाद अब डूंगरपुर जिला परिषद के 37 वार्डों की आरक्षण लॉटरी 17 और 18 सितंबर को निकाली जाएगी।

लॉटरी के बाद यह स्पष्ट होगा कि जिला परिषद के कौन से वार्ड सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद संभावित प्रत्याशियों की चुनावी स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

जिला परिषद के चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की नजर अब सितंबर में होने वाली लॉटरी पर है। कई दावेदार लंबे समय से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यदि वार्ड का आरक्षण बदलता है तो उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

राजनीतिक दल भी वार्ड आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद टिकट वितरण को लेकर अंतिम स्तर पर मंथन करेंगे। जिला प्रमुख पद के लिए ST ओपन आरक्षण होने से पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने मजबूत उम्मीदवार चुनने की चुनौती भी रहेगी।

जिला प्रमुख पद का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि जिला परिषद के निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से होता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए अधिक से अधिक जिला परिषद सदस्य जिताना महत्वपूर्ण होगा। जिला परिषद के 37 वार्डों के परिणाम ही आगे जिला प्रमुख के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

फिलहाल डूंगरपुर में जिला प्रमुख पद ST ओपन होने और 37 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सितंबर में होने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सितंबर में लॉटरी के बाद जिले की पंचायत चुनाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी तथा संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी भी सामने आने लगेगी।