डूंगरपुर में कैंडल मार्च निकाल शहीदों को किया नमन, विभाजन की पीड़ा और विस्थापितों के संघर्ष को किया याद
भारत विभाजन की त्रासदी और उस दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों की स्मृति में डूंगरपुर में कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विभाजन के समय लाखों लोगों को झेलनी पड़ी पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को याद किया।
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने हाथों में जलती मोमबत्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से यात्रा की। इस दौरान भारत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में मौन रखकर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विभाजन देश के इतिहास की ऐसी त्रासदी थी, जिसकी पीड़ा से लाखों परिवार प्रभावित हुए।
लाखों लोगों को करना पड़ा विस्थापन
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के समय बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ा। कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और लंबे समय तक विस्थापन तथा असुरक्षा की स्थिति का सामना किया।
विभाजन के दौरान हुई हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। कैंडल मार्च के माध्यम से उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने उस दौर में अपना जीवन गंवाया या विस्थापन का दर्द झेला।
शहीदों को किया नमन
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने शहीदों की स्मृति में श्रद्धा व्यक्त की। मोमबत्तियों की रोशनी के बीच लोगों ने देश की एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
वक्ताओं ने कहा कि इतिहास की त्रासद घटनाओं को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उन घटनाओं से सीख दिलाना है। उन्होंने कहा कि देश की एकता, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।
विभाजन की पीड़ा को याद करने का संदेश
कार्यक्रम में भारत विभाजन से जुड़े इतिहास और उसके सामाजिक प्रभाव पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि लाखों विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में नए स्थानों पर अपना जीवन दोबारा शुरू किया और देश के निर्माण में योगदान दिया।
कैंडल मार्च के जरिए उनके संघर्ष और धैर्य को भी याद किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शहीदों और विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की।
डूंगरपुर में आयोजित यह कैंडल मार्च इतिहास की उस पीड़ा को याद करने के साथ देश की एकता, शांति और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाला कार्यक्रम रहा।
