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दशामाता व्रत पर महिलाओं ने किया पूजन, 10 गांठ वाला धागा पहनकर परिवार की खुशहाली की कामना

 
दशामाता व्रत पर महिलाओं ने किया पूजन, 10 गांठ वाला धागा पहनकर परिवार की खुशहाली की कामना

शहर में महिलाओं ने परंपरागत आस्था के साथ दशामाता व्रत और पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर दशामाता का धागा पहना, जिसमें परंपरा के अनुसार 10 गांठें लगाई गईं। पूजन के बाद महिलाओं ने माता की कथा सुनी और अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि और दशा सुधारने की प्रार्थना की।

सुबह से ही मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को सजाया और माता की प्रतिमा या प्रतीक स्वरूप की स्थापना कर दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित किया। इसके बाद श्रद्धा के साथ दशामाता की कथा का श्रवण किया गया।

दशामाता व्रत में धागे में दस गांठें लगाने की विशेष परंपरा है। पूजा के बाद यह धागा महिलाएं अपने गले या हाथ में धारण करती हैं। मान्यता है कि इससे परिवार की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

महिलाओं ने बताया कि दशामाता का व्रत हर वर्ष बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस दिन महिलाएं माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और अच्छे भविष्य की कामना करती हैं। कई जगह महिलाओं ने सामूहिक रूप से एकत्र होकर कथा और भजन-कीर्तन भी किए।

पूजन के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत और पूजा की शुभकामनाएं भी दीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दशामाता व्रत करने से जीवन की कठिन परिस्थितियां और कष्ट दूर होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है।

शहर के कई इलाकों में महिलाओं ने समूह बनाकर पारंपरिक तरीके से दशामाता का पूजन किया। इसके बाद प्रसाद वितरण भी किया गया। धार्मिक वातावरण के बीच महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ यह पर्व मनाया।

इस प्रकार दशामाता व्रत के अवसर पर महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली, समृद्धि और मंगल की कामना की। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी महिलाएं पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ इसे निभा रही हैं।