डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस का बड़ा ऐलान, भरत नागदा होंगे सभापति पद के उम्मीदवार
डूंगरपुर नगर निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने सभापति पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी ने पूर्व नगर अध्यक्ष और मुस्कान संस्थान के संचालक भरत नागदा को डूंगरपुर नगर परिषद से सभापति पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस के इस ऐलान के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
भरत नागदा लंबे समय से स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे हैं। पूर्व नगर अध्यक्ष के रूप में भी वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा वे मुस्कान संस्थान के संचालक के तौर पर सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। पार्टी ने उनके राजनीतिक और सामाजिक अनुभव को देखते हुए उन्हें सभापति पद की जिम्मेदारी के लिए चुना है।
कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भरत नागदा को बधाई देते हुए चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने की बात कही।
डूंगरपुर नगर परिषद के चुनाव में सभापति पद को लेकर पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। वार्डों के आरक्षण और चुनावी समीकरण सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहे थे। अब कांग्रेस ने अपना चेहरा साफ कर दिया है।
भरत नागदा के सामने अब चुनाव में कांग्रेस के पार्षद उम्मीदवारों को एकजुट रखने और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की चुनौती होगी। सभापति का चुनाव सीधे तौर पर जनता के बजाय निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से होने की स्थिति में पार्टी के लिए पर्याप्त पार्षदों का समर्थन हासिल करना अहम होगा।
कांग्रेस की नजर डूंगरपुर नगर परिषद में अपने पक्ष में अधिक से अधिक पार्षद जिताने पर भी रहेगी। इसके लिए पार्टी स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों को प्रमुखता से उठाकर मतदाताओं के बीच पहुंच बनाने की तैयारी कर सकती है।
वहीं सागवाड़ा नगर पालिका के लिए कांग्रेस ने अभी अपने सभापति पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। पार्टी में सागवाड़ा को लेकर मंथन जारी बताया जा रहा है। संभावित दावेदारों के नामों पर चर्चा के बाद जल्द ही उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया जा सकता है।
डूंगरपुर में भरत नागदा की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद अब अन्य राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी नजर रहेगी। भाजपा समेत अन्य दल अपने उम्मीदवारों के नाम सामने ला सकते हैं। इसके बाद सभापति पद के मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
कांग्रेस के इस फैसले से डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव में पार्टी की रणनीति सामने आ गई है। भरत नागदा के राजनीतिक अनुभव और सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता को पार्टी उनके पक्ष में प्रमुख ताकत के रूप में पेश कर सकती है। अब देखना होगा कि चुनाव में कांग्रेस को कितने पार्षदों का समर्थन मिलता है और सभापति पद के लिए मुकाबला किस दिशा में जाता है।
