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डूंगरपुर में खाई में गिरी बस, 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस: मॉक ड्रिल में सामने आई आपात तैयारी की हकीकत

 
डूंगरपुर में खाई में गिरी बस, 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस: मॉक ड्रिल में सामने आई आपात तैयारी की हकीकत

डूंगरपुर जिले में आपदा और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल में एक बस के खाई में गिरने का दृश्य तैयार किया गया। हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल को सक्रिय किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह देखना था कि किसी वास्तविक दुर्घटना के दौरान पुलिस, प्रशासन, चिकित्सा विभाग और बचाव दल कितनी तेजी से मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर सकते हैं।

अभ्यास के दौरान बस के खाई में गिरने की सूचना दी गई। इसके बाद मौके पर बचाव और राहत कार्य शुरू किया गया। घायलों को बस से बाहर निकालने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया। हालांकि इस दौरान एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में करीब 40 मिनट का समय लगा। इस देरी ने जिले की आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े किए।

हादसे की सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ सिस्टम

मॉक ड्रिल में बस दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया। पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे तथा खाई में फंसे लोगों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। घटनास्थल तक पहुंचने में आने वाली चुनौतियों को भी अभ्यास के दौरान देखा गया।

ऐसे अभ्यास का मकसद केवल राहत और बचाव की प्रक्रिया को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में आने वाली व्यावहारिक परेशानियों की पहचान करना भी होता है। इसी दौरान एंबुलेंस के पहुंचने में लगे करीब 40 मिनट को भी महत्वपूर्ण बिंदु के तौर पर देखा गया।

एंबुलेंस पहुंचने में लगा 40 मिनट का समय

मॉक ड्रिल के दौरान सबसे अहम बात एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने का समय रहा। दुर्घटना स्थल पर एंबुलेंस को पहुंचने में करीब 40 मिनट लगे। वास्तविक हादसे की स्थिति में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में दूरदराज या दुर्गम इलाकों में एंबुलेंस की त्वरित पहुंच व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन के लिए चुनौती हो सकता है।

अभ्यास के जरिए यह भी सामने आया कि सड़क की स्थिति, घटनास्थल की लोकेशन और आपातकालीन वाहनों की उपलब्धता जैसे कारण राहत कार्य की गति को प्रभावित कर सकते हैं।

मॉक ड्रिल से कमियां पहचानने का प्रयास

जिला प्रशासन की ओर से सिविल डिफेंस अभ्यास का आयोजन आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को जांचने के उद्देश्य से किया गया। डूंगरपुर में इससे पहले भी विभिन्न परिस्थितियों को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती रही हैं।

मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों ने राहत और बचाव दल के समन्वय, घायलों को निकालने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया को परखा। इस तरह के अभ्यास से वास्तविक आपदा के समय सामने आने वाली कमियों को पहले ही चिन्हित कर उनमें सुधार किया जा सकता है।

वास्तविक हादसे में कम से कम समय में मदद पहुंचाना चुनौती

डूंगरपुर जैसे इलाकों में सड़क दुर्घटना या अन्य आपदा की स्थिति में कई बार घटनास्थल तक पहुंचना राहत एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में नियमित मॉक ड्रिल के जरिए पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और बचाव दल के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर दिया जाता है।

इस मॉक ड्रिल में एंबुलेंस के पहुंचने में लगे 40 मिनट का समय भी इसी तरह की व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत की ओर संकेत करता है। अभ्यास के बाद सामने आई कमियों के आधार पर आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था में सुधार किए जाने की उम्मीद है।