दौसा की स्थायी लोक अदालत ने बिजली निगम को 35 माह से पुरानी वसूली रोकने का आदेश दिया
दौसा की स्थायी लोक अदालत ने बिजली उपभोक्ताओं के हित में अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने बिजली निगम को निर्देश दिया है कि वह 35 माह से अधिक पुरानी बकाया वसूली नहीं कर सकता। इस फैसले से उपभोक्ताओं को लंबे समय से चले आ रहे बिलों और वसूली के दवाब से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लोक अदालत के आदेश में कहा गया है कि उपभोक्ताओं पर अत्यधिक पुराने बिलों का बोझ डालना अनुचित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 35 माह से अधिक की वसूली के लिए निगम को कानूनी आधार की आवश्यकता होगी और ऐसे मामले सीधे अदालत में जाएँगे। यह निर्णय उपभोक्ताओं के हित और बिजली कानून के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है।
स्थानीय लोगों ने इस आदेश का स्वागत किया है। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि पिछले कई वर्षों से पुराने बिलों और जुर्माने के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। एक उपभोक्ता ने कहा, “अदालत का यह फैसला हम जैसे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है। अब हमें पुरानी वसूली की चिंता नहीं होगी।”
बिजली निगम के अधिकारियों ने कहा कि वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे और लंबित वसूली में से 35 माह से अधिक की राशि वसूलने से बचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि निगम अपने ग्राहकों को अधिक पारदर्शी बिलिंग प्रणाली और समय पर जानकारी देने के लिए कदम उठा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उपभोक्ताओं के अधिकारों और बिजली कानून की व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण है। इससे उपभोक्ताओं में न्याय का भरोसा बढ़ेगा और निगम भी अपनी वसूली प्रक्रिया में नियमों का पालन करेगा।
लोक अदालत के इस निर्णय के बाद दौसा जिले के उपभोक्ता अब अपनी बिजली बिल और वसूली के मामलों में अधिक जागरूक होंगे। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी भी समय अपने बिलों और भुगतान की स्थिति की जानकारी मिलने का अधिकार है और निगम को इस मामले में पारदर्शी होना अनिवार्य है।
पिछले कुछ सालों में बिजली बिलों की वसूली के विवाद और लंबित बकाया राशि को लेकर उपभोक्ताओं और निगम के बीच कई मामलों में संघर्ष देखा गया। इस आदेश के बाद उपभोक्ताओं को अब पुराने बिलों के दबाव से राहत मिलेगी और वे अपने वर्तमान बिलों का भुगतान सुरक्षित तरीके से कर पाएंगे।
स्थानीय प्रशासन और उपभोक्ता संगठन भी इस आदेश का स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और बिजली वसूली प्रक्रिया में सुधार के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
इस तरह, दौसा की स्थायी लोक अदालत का यह आदेश बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। 35 माह से अधिक पुरानी वसूली पर रोक से उपभोक्ताओं को आर्थिक और मानसिक सुरक्षा मिलेगी और बिजली निगम भी अपनी वसूली प्रक्रिया में नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होगा।
