विधानसभा में गूंजा दौसा तहसीलदार का मामला, विधायक दीनदयाल बैरवा के गंभीर आरोप; बोले— ‘न कानून मानता, न जनप्रतिनिधियों का सम्मान’
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को दौसा जिले के एक तहसीलदार का मामला जोरदार तरीके से उठा। दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने सदन में तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी न तो कानून का पालन करता है और न ही जनप्रतिनिधियों का सम्मान करता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक बैरवा ने सदन में कहा कि दौसा में पदस्थ तहसीलदार की कार्यशैली पूरी तरह मनमानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जनता की सुनवाई करने के बजाय अपनी मनमर्जी से फैसले ले रहा है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों की बातों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
बैरवा ने कहा, “वह खुलेआम खुद को दौसा की जमीन का मालिक समझता है। न नियमों की परवाह है और न ही जनप्रतिनिधियों का सम्मान।” उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय में आम लोगों के काम समय पर नहीं हो रहे हैं और लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विधायक ने यह भी कहा कि कई बार शिकायतों के बावजूद अधिकारी के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे क्षेत्र की जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
सदन में इस मुद्दे पर कुछ देर चर्चा भी हुई। अन्य विधायकों ने भी प्रशासनिक जवाबदेही और जनता की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया। बैरवा ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में इस तरह के आरोपों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं और सरकार के लिए जवाब देना जरूरी हो जाता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।
