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दौसा के निकायों में 105 वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व, 325 में 180 अनारक्षित; दो निकायों में ST की 12 सीटें

 
दौसा के निकायों में 105 वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व, 325 में 180 अनारक्षित; दो निकायों में ST की 12 सीटें

राजस्थान में निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच दौसा जिले के शहरी निकायों में वार्ड आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है। जिले के निकायों में कुल 325 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें 105 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि 180 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। वहीं, जिले के दो निकायों में अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग के लिए कुल 12 वार्ड आरक्षित किए गए हैं।

वार्ड आरक्षण की सूची सामने आने के बाद संभावित प्रत्याशियों की चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। आरक्षण के कारण कई दावेदारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जबकि आरक्षित वार्डों में नए चेहरे भी सक्रिय होने लगे हैं।

105 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

दौसा जिले के निकायों में कुल 105 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के महिला वार्ड भी शामिल हैं।

महिला आरक्षण के बाद कई वार्डों में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदार अब अपने परिवार की महिला सदस्यों के लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं।

180 वार्ड अनारक्षित

कुल 325 वार्डों में से 180 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। इन वार्डों में किसी भी वर्ग के पात्र उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे।

अनारक्षित वार्डों पर राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की विशेष नजर है। कई दावेदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है।

दो निकायों में ST की 12 सीटें

आरक्षण प्रक्रिया के तहत जिले के दो शहरी निकायों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कुल 12 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इनमें ST सामान्य और ST महिला श्रेणी के वार्ड शामिल हैं।

इन सीटों पर ST वर्ग के उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। आरक्षण सूची के बाद संबंधित क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

आरक्षण से बदले चुनावी समीकरण

वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद कई संभावित प्रत्याशियों के समीकरण बदल गए हैं। जिन वार्डों से सामान्य वर्ग के उम्मीदवार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, उनमें आरक्षण लागू होने पर उन्हें दूसरे वार्डों का विकल्प तलाशना पड़ सकता है।

वहीं, आरक्षित वार्डों में राजनीतिक दल अब मजबूत उम्मीदवारों की तलाश करेंगे। स्थानीय स्तर पर बैठकों और जनसंपर्क का दौर भी बढ़ने की उम्मीद है।

उम्मीदवारों की नजर पूरी सूची पर

वार्ड आरक्षण की पूरी सूची सामने आने के बाद अब संभावित उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड की स्थिति देख रहे हैं। चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह सूची बेहद महत्वपूर्ण है।

निकाय चुनाव की आगे की प्रक्रिया में इसी आरक्षण व्यवस्था के आधार पर उम्मीदवारों का चयन और नामांकन होगा। अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय दावेदारों की नजर चुनाव कार्यक्रम और प्रत्याशी चयन पर रहेगी।