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सैंथल सागर बांध में रिकॉर्ड जलस्तर के बावजूद रबी फसल के लिए नहरें बंद रहेंगी, किसानों में निराशा

 
सैंथल सागर बांध में रिकॉर्ड जलस्तर के बावजूद रबी फसल के लिए नहरें बंद रहेंगी, किसानों में निराशा

करीब दो दशक बाद सैंथल सागर बांध में रिकॉर्ड स्तर तक पानी भर जाने के बावजूद इस बार रबी सीजन के लिए नहरें नहीं खोली जाएंगी। जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और जल उपयोक्ता संगम की श्रृंखलाबद्ध बैठकों में लिए गए इस निर्णय की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। यह फैसला कलेक्टर देवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

सैंथल सागर बांध में इस वर्ष मानसूनी बारिश के दौरान जल भंडारण क्षमता लगभग पूरी भर गई थी। बांध के रिकॉर्ड जलस्तर ने किसानों में उम्मीदें जगा दी थीं कि इस रबी सीजन में नहरों के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन तकनीकी कारणों, मेंटेनेंस कार्य और नहर तंत्र की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नहरें न खोलने का निर्णय लिया है। इससे किसानों में निराशा फैल गई है, क्योंकि कई किसान इस बार गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की बुवाई के लिए नहर जल पर निर्भर थे।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नहर प्रणाली पिछले कई वर्षों से मेंटेनेंस के अभाव में जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर नहरें टूट चुकी हैं, जिससे पानी का भारी नुकसान होता है। यदि नहरें खोली जातीं, तो पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में बह जाता। विभाग ने कहा कि नहरों की मरम्मत के लिए व्यापक बजट और समय की आवश्यकता है, जिस पर काम शुरू किया जाएगा, लेकिन मौजूदा सीजन में नहरें खोलना संभव नहीं है।

बैठक में मौजूद जल उपयोक्ता संगम प्रतिनिधियों ने भी नहरों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि बिना मरम्मत के नहरें खोली जातीं, तो पानी की बर्बादी तो होती ही, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रिसाव के कारण नुकसान भी हो सकता था। इस कारण संगम सदस्यों ने भी प्रशासन के फैसले का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने भविष्य के लिए त्वरित सुधार कार्यों की मांग रखी।

कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों को निराश न होने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन अन्य विकल्पों पर काम कर रहा है, जिसमें कृषि विभाग की मदद से सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों—ड्रिप और स्प्रिंकलर—के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर पर्याप्त है, वहां ट्यूबवेल और कुओं के जरिए सिंचाई के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि नहर तंत्र की सम्पूर्ण मरम्मत और मजबूतीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। अगले वर्ष से नहरों को फिर से चालू करने की दिशा में काम होगा। जिला प्रशासन ने जल संसाधन विभाग को नहरों की तकनीकी समीक्षा रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि इस निर्णय से किसानों की चिंताएँ कम नहीं हुई हैं। कई किसान संगठनों ने कहा है कि नहर बंद होने से खर्च बढ़ेगा और पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। वे प्रशासन से राहत उपायों की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि फैसले का उद्देश्य पानी की हानि रोकना और भविष्य के लिए नहर प्रणाली को पुनर्स्थापित करना है। किसान समुदाय उम्मीद जता रहा है कि आने वाले वर्षों में नहरें फिर से सिंचाई का प्रमुख स्रोत बन सकेंगी।