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Dausa प्रति पैकेट 8 की बजाय 12 रुपए का भुगतान उठाया, DLB के गड़बड़ी को लेकर पत्र पर कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

 
Dausa प्रति पैकेट 8 की बजाय 12 रुपए का भुगतान उठाया, DLB के गड़बड़ी को लेकर पत्र पर कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

दौसा न्यूज़ डेस्क !!! इंदिरा रसोई के जरिए शहरी क्षेत्रों में चलाई गई फूड पैकेट्स योजना में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। दौसा नगर परिषद का है, यहां मई व जून 2021 में वितरित किए गए भोजन पैकेट्स का कोई रिकार्ड ही नहीं है।क्षेत्रीय उपनिदेशक की जांच रिपोर्ट में ये अनियमितताएं सामने आई हैं। कई फर्मों को नियम विरूद्ध भुगतान भी कर दिया गया। व्यक्ति भूखा न रहे, हर जरूरतमंद को खाना मिल सके इसे लेकर राज्य सरकार द्वारा इंदिरा रसोई चलाई गई थी।

उपनिदेशक रेणु खण्डेलवाल द्वारा पकड़े गए भारी गड़बड़झाले में राज्य सरकार को लाखों रूपए का चूना लगाने का अंदेशा जाहिर ​किया गया है।  पूरे गड़बड़झाले में ऐसी कई अनियमितताएं शामिल हैं जो सहज ही किसी के गले नहीं उतर रही हैं। पकडी गई अनियमितताओं की जांच के लिए डीएलबी ने कलेक्टर पीयूष समारिया को जांच करवाने के लिए पत्र भेजा। जिस पर जिला कोषाधिकारी रामचरण मीणा के सुपरविजन में कमेटी गठित कर जांच शुरू की गई है।

परिषद द्वारा 16 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 तक कुल 1 लाख 49 हजार 664 भोजन पैकेट के निशुल्क वितरण का भुगतान किया गया। लेकिन भुगतान स्वीकृति 1 लाख 79 हजार 754 पैकेटस की किया जाना बताया गया जबकि इंदिरा रसोई प्रभारी इसे 1 लाख 46 हजार 284 ही स्वीकार कर रहा है। 30 हजार पैकेट्स के वितरण व भुगतान में अन्तर पाया गया है।
परिषद द्वारा कुल 15 हजार 128 कोरोना संक्रमितों को भोजन करवाने का भुगतान किया गया जबकि ड्राइव पर अपलोड सूचना में महज 2430 लोगों को भोजन पहुंचाने का हिसाब अपलोड किया गया। कुल 12 हजार 698 पैकेट का अन्तर पाया गया। 

भोजन की उपलब्धता का कोई प्रमाण नहीं कि इतने संक्रमितों को भोजन की जरूरत है। बिलों पर उपलब्धता के लिए गार्ड व नर्सिंग अधीक्षक के हस्ताक्षर कराए गये जबकि पीएमओ की तरफ से कोई डिमांड भेजी ही नहीं गई थी। शिक्षा समिति द्वारा भोजन पैकेट की दर 8 रुपए जो नगर परिषद से व शेष राज्य सरकार से भुगतान करना था, में नगर परिषद ने बिना किसी अनुमोदन के 12 रुपये प्रति पैकेट से भुगतान कर दिया सरकार द्वारा 12 रुपए अनुदान दिया जाता है। ऐसे में अंदेशा है कि समिति ने 12 रुपए भुगतान के साथ सरकार से 12 रुपए का अनुदान भी उठा लिया गया।