लालसोट में नामांकन नहीं कर पाई पार्षद: नामांकन कक्ष में घुसने नहीं देने का आरोप, अधिकारी बोले- समय खत्म होने के बाद आई थीं
राजस्थान के दौसा जिले की लालसोट नगर परिषद में सभापति पद के नामांकन को लेकर बुधवार को विवाद सामने आया। एक पार्षद ने आरोप लगाया कि वह सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंची थीं, लेकिन उन्हें नामांकन कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया गया। पार्षद का कहना है कि वह निर्धारित समय के भीतर नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहुंची थीं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। वहीं निर्वाचन अधिकारियों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्षद नामांकन का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद पहुंची थीं।
नामांकन कक्ष के बाहर हुआ विवाद
लालसोट नगर परिषद में सभापति पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया के दौरान यह घटनाक्रम सामने आया। पार्षद नामांकन दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंचीं, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें नामांकन कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद मौके पर कुछ देर तक स्थिति को लेकर असमंजस बना रहा।पार्षद की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि वह नामांकन दाखिल करने के लिए पहुंची थीं तो उन्हें प्रक्रिया पूरी करने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। उनका कहना था कि वह अपनी दावेदारी पेश करना चाहती थीं, लेकिन प्रवेश नहीं मिलने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर सकीं।
अधिकारी बोले- समय खत्म होने के बाद पहुंचीं
मामले में निर्वाचन अधिकारियों का अलग पक्ष है। अधिकारियों के अनुसार नामांकन दाखिल करने के लिए निर्धारित समय दोपहर 3 बजे तक था। उनका कहना है कि संबंधित पार्षद निर्धारित समय समाप्त होने के बाद नामांकन कक्ष में पहुंचीं। ऐसे में नियमों के अनुसार उन्हें नामांकन दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।लालसोट नगर परिषद के सभापति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया 16 सितंबर को पूरी हुई। कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच और 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की प्रक्रिया होनी है। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए मतदान और मतगणना होगी।
लालसोट में कांग्रेस के पास बहुमत
लालसोट नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। हाल ही में घोषित चुनाव परिणामों में कांग्रेस ने 18 वार्डों में जीत दर्ज की है, जो बहुमत के लिए जरूरी 18 सीटों के बराबर है। भाजपा के खाते में 12 सीटें आई हैं, जबकि 5 पार्षद निर्दलीय चुने गए हैं।सभापति पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में किसी भी वर्ग और किसी भी लिंग का निर्वाचित पार्षद इस पद के लिए पात्र है। सभापति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती, बल्कि निर्वाचित पार्षद मतदान के जरिए सभापति का चुनाव करते हैं।
अब नामांकन की जांच के बाद स्थिति होगी साफ
नामांकन को लेकर सामने आए विवाद के बीच अब निर्वाचन प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर है। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसके बाद 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी के बाद सभापति पद के चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।लालसोट में कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और उम्मीदवारों की अंतिम सूची चुनावी प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बना रही है। वहीं नामांकन कक्ष में प्रवेश को लेकर लगाए गए आरोपों पर अधिकारी समय सीमा का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर नामांकन जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पर टिकी है।
