दौसा नगर परिषद में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत से दूर; 14 निर्दलीय तय करेंगे बोर्ड
दौसा नगर परिषद चुनाव के सभी 55 वार्डों के नतीजे सामने आ चुके हैं। चुनाव परिणामों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई है। कांग्रेस ने 24 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के खाते में 17 सीटें आई हैं। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 वार्डों में जीत हासिल की है। ऐसे में अब नगर परिषद में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
55 वार्डों वाली दौसा नगर परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे आगे है, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी संख्या तक नहीं पहुंच सकी। भाजपा 17 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं 14 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने पूरे चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है।
चुनाव परिणामों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर परिषद में अगला बोर्ड किसका बनेगा। कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा सीटें हैं, इसलिए बोर्ड गठन के लिए वह मजबूत स्थिति में है। हालांकि बहुमत नहीं होने के कारण कांग्रेस को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर भाजपा भी निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकती है।
निर्दलीय पार्षदों की संख्या 14 होना उन्हें नगर परिषद की राजनीति में खासा प्रभावशाली बनाता है। यदि सभी या पर्याप्त संख्या में निर्दलीय किसी एक दल के साथ जाते हैं तो बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और समर्थन जुटाने को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
दौसा नगर परिषद चुनाव में निर्दलीयों के मजबूत प्रदर्शन को स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वार्डों में मतदाताओं ने प्रमुख राजनीतिक दलों के बजाय स्वतंत्र उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। इससे यह संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, जनसंपर्क और वार्ड से जुड़े मुद्दों का चुनाव परिणामों पर असर रहा।
कांग्रेस के लिए 24 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनना निश्चित रूप से राहत की बात है, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए उसे अभी राजनीतिक समीकरण साधने होंगे। भाजपा के पास 17 पार्षद हैं और वह कांग्रेस को रोकने के लिए निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की रणनीति अपना सकती है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।
अब नगर परिषद के अगले चरण में बोर्ड गठन और प्रमुख पदों के चुनाव पर नजर रहेगी। खासतौर पर सभापति पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ सकती है। किस दल को निर्दलीयों का समर्थन मिलता है, इससे दौसा नगर परिषद की आगे की राजनीतिक दिशा तय होगी।
कुल मिलाकर 55 वार्डों के परिणामों में कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, भाजपा को 17 और निर्दलीयों को 14 सीटें मिलीं। कांग्रेस बहुमत से दूर है और भाजपा भी अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में 14 निर्दलीय पार्षद दौसा नगर परिषद में बोर्ड गठन के लिए किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
