हर तरफ आंसू और चित्कार, वैष्णो देवी हादसे में मृतकों के शव सुजानगढ़ पहुंचे, परिवार में मचा कोहराम
वैष्णो देवी हादसे में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के शव जब सुजानगढ़ पहुंचे, तो पूरा कस्बा ग़म और आंसुओं में डूब गया। यह हादसा ना केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरी सुजानगढ़ की जनता के लिए एक गहरा आघात बन गया। हादसे में जान गंवाने वालों के शवों के पहुंचते ही घरों में आंसू, चित्कार और अभी भी महसूस हो रहे दर्द का माहौल था।
यह बेहद दिल दहला देने वाली घटना थी, क्योंकि मृतकों के परिवार के सदस्यों ने तीन दिनों तक इस भयंकर हादसे की सूचना को अपने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों से छिपाए रखा था। यह फैसला उनके दिल पर भारी पड़ने वाला था, लेकिन रिश्तेदारों और कस्बे के लोगों ने आपसी सहमति से यह कदम उठाया, ताकि दुख की घड़ी में परिवार को और अधिक मानसिक सदमा न लगे।
घटनास्थल की दूरी और परिवार का दर्द
यह हादसा वैष्णो देवी के मंदिर के पास हुआ था, जहां श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। यात्रा के दौरान हुए इस हादसे में कई लोग मारे गए, जिनमें से कुछ लोग सुजानगढ़ के निवासी थे। हादसे के बाद, शवों को परिवार तक लाने में तीन दिन का वक्त लगा। इन तीन दिनों में परिवार के सदस्य खुद को संभालने की कोशिश कर रहे थे, ताकि अन्य परिजनों पर किसी तरह का मानसिक दबाव न बने।
कस्बे में ग़म का माहौल
जैसे ही मृतकों के शव घर पहुंचे, पूरे कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के चेहरे पर बेहद ग़म और दर्द साफ दिखाई दे रहा था। कुछ परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया, वहीं कुछ परिवार अब भी सदमे में हैं। यह घटना सभी के लिए एक कभी न भूलने वाला दर्द बन गई है।
साथी और परिवार की भूमिका
कस्बे के लोग और रिश्तेदार, जिन्होंने इस समय अपनों के लिए सहारा बनने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि यह घटना उनके लिए भी बेहद कठिन थी, लेकिन उन्होंने परिवार के अंदर मौजूद हिम्मत और साहस को बनाए रखने की पूरी कोशिश की। परिवार की मजबूती ही थी, जिसके कारण इस कठिन वक्त को लोग एक साथ और साहस के साथ झेल पाए।
