सावन के तीसरे सोमवार पर चित्तौड़गढ़ के समिधेश्वर महादेव के दर्शन, एक ही प्रतिमा में ब्रह्मा-विष्णु-महेश के स्वरूप
सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर चित्तौड़गढ़ का विश्व प्रसिद्ध दुर्ग भगवान शिव की भक्ति में रंगा हुआ है। दुर्ग परिसर में स्थित प्राचीन समिधेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। करीब 11वीं शताब्दी में निर्मित यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी स्थापत्य कला और गर्भगृह में स्थापित अद्भुत शिव प्रतिमा के लिए विशेष पहचान रखता है।
समिधेश्वर मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। मंदिर की प्राचीन संरचना 32 पिलरों पर टिकी हुई बताई जाती है। पत्थरों से निर्मित मंदिर की नक्काशी और स्थापत्य शैली उस दौर की कला-कौशल की झलक दिखाती है। सावन के सोमवार पर यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की मानवाकार प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से निर्मित बताई जाती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव के स्वरूपों का अद्भुत समावेश दिखाई देता है। इसी विशेषता के कारण समिधेश्वर महादेव की प्रतिमा धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मान्यता है कि भगवान शिव की इस प्रतिमा में सृष्टि के तीन प्रमुख स्वरूपों का दर्शन होता है। प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूपों को दर्शाया गया है। श्रद्धालु इसे त्रिदेव के एक रूप में दर्शन करने का दुर्लभ अवसर मानते हैं।
सावन के तीसरे सोमवार पर भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और अभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं और वातावरण भक्तिमय नजर आता है।
समिधेश्वर मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, पत्थरों पर की गई नक्काशी और विशाल संरचना पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। चित्तौड़गढ़ दुर्ग आने वाले पर्यटक यहां दर्शन करने के साथ मंदिर की स्थापत्य कला को भी करीब से देखते हैं।
सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से चित्तौड़गढ़ आने वाले श्रद्धालु दुर्ग स्थित समिधेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं।
11वीं शताब्दी का यह प्राचीन मंदिर आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता को संजोए हुए है। 32 पिलरों पर टिकी मंदिर की संरचना और एक ही पत्थर से बनी मानवाकार शिव प्रतिमा इसे खास बनाती है। गर्भगृह में त्रिदेव के स्वरूप वाली इस प्रतिमा के दर्शन सावन के तीसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव बन जाते हैं।
