ऑनलाइन ठगी में पांच मिनट में डेढ़ लाख से ज्यादा की रकम साफ
ऑनलाइन ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने महज पांच मिनट के भीतर पीड़ित के खाते से डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली। ठगी की वारदात को लगातार छह ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए अंजाम दिया गया। कुछ ही मिनटों में खाते से पूरी रकम निकल जाने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके बैंक खाते से इतनी तेजी से रकम निकाली जा रही है। एक के बाद एक हुए छह ट्रांजेक्शन के जरिए ठगों ने खाते में मौजूद रकम को साफ कर दिया। जब पीड़ित को बैंक खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली तो उसके होश उड़ गए। उसने तत्काल बैंक से संपर्क कर लेनदेन की जानकारी जुटाई और इसके बाद पुलिस को शिकायत दी।
बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने बेहद कम समय में पूरी वारदात को अंजाम दिया। पांच मिनट के भीतर हुए लगातार छह ट्रांजेक्शन ने पुलिस के सामने भी कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते या उससे जुड़े डिजिटल माध्यम तक कैसे पहुंच बनाई।
पुलिस की साइबर टीम ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी खंगाल रही है। रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई, किस डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल किया गया और ट्रांजेक्शन के दौरान कौन-कौन से तकनीकी माध्यम सक्रिय थे, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस बैंक अधिकारियों और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जानकारी जुटा सकती है, ताकि आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सके।
साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं ने ऑनलाइन बैंकिंग करने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग संबंधी जानकारी देने से भी बचना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि खाते से किसी तरह का संदिग्ध लेनदेन होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने पर ठगी की रकम को रोकने या उसकी रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल पुलिस छह ट्रांजेक्शन और उनसे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।
