चित्तौड़गढ़ में बायोलॉजिकल पार्क बनाने की पहल तेज, दुर्ग की तलहटी में 35 हेक्टेयर में विकसित होगा नया आकर्षण
चित्तौड़गढ़ शहर को बायोलॉजिकल पार्क की सौगात देने की दिशा में वन विभाग ने नई पहल शुरू कर दी है। विभाग ने गांधीनगर स्थित स्मृति वन से मोहर मंगरी तक, चित्तौड़गढ़ दुर्ग की तलहटी में करीब 35 हेक्टेयर क्षेत्र में बायोलॉजिकल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस परियोजना के अमल में आने से शहर को न केवल एक नया पर्यटन स्थल मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित बायोलॉजिकल पार्क में स्थानीय वन्यजीवों और पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। यहां प्राकृतिक वातावरण में पशु-पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास तैयार किए जाएंगे, ताकि लोग उन्हें करीब से देख सकें और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़े।
बताया जा रहा है कि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। इसमें वॉकिंग ट्रैक, व्यू प्वाइंट, बच्चों के लिए नेचर एजुकेशन जोन, हरियाली और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल की जा सकती हैं। साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यह स्थान मनोरंजन और शिक्षा का केंद्र बनेगा।
अधिकारियों का कहना है कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग पहले से ही ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे में दुर्ग की तलहटी में बायोलॉजिकल पार्क बनने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वन विभाग ने इस प्रस्ताव को उच्च अधिकारियों और राज्य सरकार के समक्ष भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत योजना बनाकर कार्य शुरू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि यह परियोजना शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे शहर में हरित क्षेत्र बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल बायोलॉजिकल पार्क की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसके बाद इसे धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया जाएगा।
