चित्तौड़गढ़ में महिलाओं ने परिवार संग की होलिका परिक्रमा, शुभ मुहूर्त में हुआ दहन
जिलेभर में होलिका दहन को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया। महिलाओं ने परिवार के साथ होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
शाम को निर्धारित शुभ मुहूर्त में पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच होलिका पूजन किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना कर कच्चा सूत, नारियल और अनाज अर्पित किया। इसके बाद अग्नि प्रज्वलित की गई। श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया और घर-परिवार की रक्षा की प्रार्थना की।
कई स्थानों पर बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। होलिका दहन के दौरान ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग झूमते नजर आए। शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
ज्योतिषीय कारणों से धुलंडी की तिथि में बदलाव
स्थानीय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के कारण होलिका दहन शुभ मुहूर्त में किया गया, लेकिन अगले दिन सूतक काल रहने की बात कही गई है। ज्योतिषियों का कहना है कि सूतक के प्रभाव के चलते रंगों की होली यानी धुलंडी अगले दिन नहीं मनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में मांगलिक कार्य और उत्सव नहीं किए जाते। इसी कारण इस वर्ष धुलंडी 4 मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों ने श्रद्धालुओं से पंचांग के अनुसार पर्व मनाने की अपील की है।
बाजारों में रौनक
धुलंडी की तिथि आगे होने के बावजूद बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की खरीदारी जोरों पर है। व्यापारियों का कहना है कि तिथि में बदलाव से खरीदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
कुल मिलाकर चित्तौड़गढ़ में होलिका दहन श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। अब शहरवासी 4 मार्च को धुलंडी मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
