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भय या अंधविश्वास? राजस्थान के इस गांव में तीन दिन तक नहीं गया कोई घर, घरों को छोड़ खेतों को क्यों बनाया आशियाना

 
भय या अंधविश्वास? राजस्थान के इस गांव में तीन दिन तक नहीं गया कोई घर, घरों को छोड़ खेतों को क्यों बनाया आशियाना 

इसे अंधविश्वास कहें या वहम! देवड़ा गांव में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव खत्म करने के लिए ग्रामीणों ने न सिर्फ तीन दिन के लिए गांव छोड़ा बल्कि एक अनोखा आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किया। गांव में 15 लाख रुपये की लागत से हनुमान मंदिर बनवाया गया और गांव खाली करने के बाद तीन दिन तक खेतों को आश्रय के तौर पर इस्तेमाल किया गया। रविवार को मंत्रोच्चार और गाजे-बाजे के साथ सबसे पहले कन्याओं ने मंगल कलश लेकर गांव में प्रवेश किया। इसके बाद सभी ने गांव में प्रवेश किया। अब गांव में सात दिन तक भागवत कथा का आयोजन होगा और रामनवमी पर हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। करीब 750 लोगों की आबादी वाले इस गांव के घरों में तीन दिन से ताले लगे हुए हैं और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

नींव खोदते समय निकल रही हड्डियां
ग्रामीणों का मानना ​​है कि उनके गांव में नकारात्मक शक्तियों के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जब कोई नए घर की नींव खोदता है तो उसमें मानव कंकाल और जानवरों की हड्डियां निकलती हैं। गांव में खुशहाली नहीं आ रही है। समाधान निकालने के लिए ग्रामीणों ने मिलकर 15 लाख रुपए की लागत से हनुमानजी का मंदिर बनवाया। प्राण प्रतिष्ठा से पहले ग्रामीणों ने 27 मार्च को गांव खाली कर दिया था।

खेतों में टेंट लगाकर परिवार के साथ रहे
गांव खाली करने के बाद ग्रामीणों ने रात के लिए खेतों को ही अपना ठिकाना बना लिया। तीन दिन तक ग्रामीण अपने बच्चों और मवेशियों के साथ बाहर ही रहे। किसी ने घर का ताला तक नहीं खोला। पुलिस और गांव के युवा गश्त करते रहे। रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिव्य आनंद धाम के संत अनंतराम शास्त्री के मार्गदर्शन में धूमधाम से जुलूस निकालकर गांव में प्रवेश किया।