8 साल पुराने दुष्कर्म मामले में कड़ा फैसला: दोषी को 20 साल की सजा, 1.40 लाख रुपए जुर्माना
जिले की पॉक्सो कोर्ट संख्या–2 ने आठ साल पुराने दुष्कर्म के मामले में कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह निर्णय मंगलवार को पॉक्सो कोर्ट–2 की पीठासीन अधिकारी शहनाज परवीन द्वारा सुनाया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2017 का है, जब आरोपी ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य एकत्रित कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
पीठासीन अधिकारी शहनाज परवीन ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार के अपराध समाज के लिए बेहद गंभीर हैं और ऐसे मामलों में सख्त सजा आवश्यक है, ताकि अपराधियों में भय पैदा हो और पीड़ितों को न्याय मिल सके। अदालत ने जुर्माने की राशि में से एक हिस्सा पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाने के निर्देश भी दिए हैं।
सरकारी वकील ने बताया कि यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम है। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने दोषी को सजा सुनाई है।
इस फैसले के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों ने इसे न्याय की जीत बताया। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट के तहत त्वरित और सख्त कार्रवाई से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।
कुल मिलाकर, चित्तौड़गढ़ की पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कानून के तहत कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी।
