चित्तौड़गढ़ में 18.27 करोड़ के कचरा संग्रहण टेंडर पर विवाद
नगर परिषद चित्तौड़गढ़ द्वारा हाल ही में 18.27 करोड़ रुपए की राशि में घर-घर कचरा संग्रहण का टेंडर जारी किया गया है। लेकिन इस टेंडर को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस के निवर्तमान सभापति संदीप शर्मा और कुछ पूर्व पार्षदों ने इस टेंडर को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह टेंडर सही तरीके से प्रक्रिया में नहीं लाया गया और इसके कारण शहरवासियों के हितों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने नगर परिषद से अपील की है कि इस टेंडर को तुरंत निरस्त किया जाए और उचित जांच के बाद ही आगे बढ़ाया जाए।
संदीप शर्मा ने कहा, “हमारा मकसद सिर्फ पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। नगर परिषद के अधिकारियों और अधिकारियों के बीच टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता होने की आशंका है। इसलिए इसे फिलहाल रोका जाना चाहिए।”
नगर परिषद के अधिकारियों ने इस मामले पर फिलहाल कोई अधिकृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, नगर परिषद ने इस टेंडर का उद्देश्य शहर के सफाई और कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करना बताया है। इस टेंडर के तहत नगर के हर घर से कचरा संग्रहित और सुरक्षित निपटान के लिए ठेकेदार नियुक्त किए जाने हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े टेंडरों में पारदर्शिता और उचित निगरानी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि प्रक्रिया में कोई कमी या अनियमितता सामने आती है तो इससे शहरी सेवाओं और जनता के विश्वास पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घर-घर कचरा संग्रहण योजना शहर के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन टेंडर विवादित होने से योजना में देरी और प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। उनका सुझाव है कि टेंडर प्रक्रिया में सभी पक्षों की भागीदारी और समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
कुल मिलाकर, नगर परिषद चित्तौड़गढ़ के 18.27 करोड़ रुपए के कचरा संग्रहण टेंडर ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के निवर्तमान सभापति और पूर्व पार्षदों की निरस्ती की मांग से यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। अब यह देखना बाकी है कि नगर परिषद और प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और शहर की सफाई योजना को समय पर लागू किया जा सके।
