चित्तौड़गढ़ के जौहर मेले में गरजे CM योगी आदित्यनाथ: वीरांगनाओं को किया नमन, एकता और नारी सम्मान पर दिया जोर
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में आयोजित ऐतिहासिक जौहर श्रद्धांजलि समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने हिस्सा लेकर मेवाड़ की वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने चित्तौड़गढ़ की धरती को वीरता, त्याग और स्वाभिमान की प्रतीक बताते हुए कहा कि यहां का इतिहास पूरे देश को प्रेरणा देता है।
समारोह में हजारों लोगों की मौजूदगी में सीएम योगी ने कहा कि जौहर केवल इतिहास की घटना नहीं बल्कि नारी सम्मान और आत्मसम्मान की प्रतीक परंपरा है। उन्होंने कहा कि चित्तौड़ की वीरांगनाओं ने अपनी अस्मिता और धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, जो दुनिया के इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग को बताया भारत की अस्मिता का प्रतीक
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, स्वाभिमान और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने देश को अनेक वीर और वीरांगनाएं दी हैं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में जो भी सकारात्मक कार्य हो रहे हैं, उनमें राजस्थान की वीर परंपरा से प्रेरणा मिली है। योगी ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया।
जातिवाद की राजनीति पर भी बोले
कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने जाति आधारित राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाज को जाति के नाम पर बांटने की राजनीति देश को कमजोर करती है और इससे राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने लोगों से ऐसी विभाजनकारी राजनीति से दूर रहने की अपील की।
महिलाओं की सुरक्षा पर दिया संदेश
सीएम योगी ने अपने भाषण में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि ऐसा वातावरण होना चाहिए जहां कोई भी बेटी बिना डर के सुरक्षित जीवन जी सके।
राजस्थान दौरे का हिस्सा था कार्यक्रम
बताया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ 15-16 मार्च को दो दिन के राजस्थान दौरे पर रहे। इसी दौरान उन्होंने चित्तौड़गढ़ के जौहर श्रद्धांजलि समारोह में भाग लिया और कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।
बड़ी संख्या में पहुंचे लोग
कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। लोगों ने वीरांगनाओं के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजकों का कहना है कि जौहर मेला केवल इतिहास का स्मरण नहीं बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी माध्यम है।
चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक दुर्ग भारत के सबसे बड़े और प्रसिद्ध किलों में से एक माना जाता है, जो मेवाड़ की वीरता और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम के जरिए एक बार फिर चित्तौड़गढ़ की वीरता और त्याग की परंपरा को याद किया गया और आने वाली पीढ़ियों को उसके महत्व से अवगत कराया गया।
