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जीपीएस और जियो-फेंसिंग से होगी 300 खनिज गाड़ियों की निगरानी, रास्ता बदलते ही विभाग को मिलेगा अलर्ट

 
जीपीएस और जियो-फेंसिंग से होगी 300 खनिज गाड़ियों की निगरानी, रास्ता बदलते ही विभाग को मिलेगा अलर्ट

खनिज परिवहन में पारदर्शिता और अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए अब 300 खनिज वाहनों की तकनीक के जरिए निगरानी की जाएगी। वाहनों में जीपीएस और जियो-फेंसिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके जरिए विभाग को वाहन की लोकेशन और निर्धारित रूट की जानकारी लगातार मिलती रहेगी। यदि कोई वाहन तय रास्ते से हटकर दूसरे मार्ग पर जाता है तो विभाग को इसकी जानकारी मिल सकेगी।

नई व्यवस्था के तहत खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। वाहन में लगे जीपीएस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की जाएगी। वहीं जियो-फेंसिंग की मदद से निर्धारित मार्ग की सीमा तय की जाएगी। वाहन के इस सीमा से बाहर जाने पर सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग को अलर्ट मिलने की व्यवस्था की जाएगी।

खनिज वाहनों की निगरानी के लिए वे-ब्रिज पर कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने में सक्षम होंगे। इससे वाहन के नंबर की पहचान कर उसके परिवहन रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकेगा। अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वाहन किस समय वे-ब्रिज से गुजरा और उसमें कितना खनिज लदा था।

अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन में होने वाली अनियमितताओं को रोकना है। कई बार खनिज से लदे वाहन निर्धारित मार्ग से हटकर दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। इससे अवैध खनिज परिवहन और राजस्व चोरी की आशंका रहती है। जीपीएस और जियो-फेंसिंग के जरिए ऐसे वाहनों की पहचान करना आसान होगा।

नई व्यवस्था में वाहन की यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा सकेगा। वाहन किस स्थान से चला, किस मार्ग से गुजरा और निर्धारित स्थान तक पहुंचा या नहीं, इसकी जानकारी सिस्टम में उपलब्ध रहेगी। इससे विभागीय अधिकारियों को वाहनों की निगरानी में सुविधा होगी।

वे-ब्रिज पर नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। कैमरे से मिलने वाले वाहन नंबर को विभागीय रिकॉर्ड से मिलाया जा सकेगा। इससे फर्जी या संदिग्ध परिवहन दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच में भी मदद मिल सकती है।

यदि कोई वाहन निर्धारित रूट से हटता है तो विभाग को तत्काल इसकी जानकारी मिलने की उम्मीद है। अधिकारी जरूरत के अनुसार वाहन को रोककर उसके दस्तावेज और खनिज की जांच कर सकेंगे। इससे अवैध खनन और खनिज परिवहन पर कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

तकनीक आधारित निगरानी से विभाग को मैनुअल जांच पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। 300 वाहनों की लगातार निगरानी के जरिए खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनिज कारोबार से जुड़े वाहन संचालकों को निर्धारित नियमों और रूट का पालन करना होगा। रास्ता बदलने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

जीपीएस, जियो-फेंसिंग और नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरों के जरिए खनिज वाहनों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है। इससे विभाग को वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ अवैध खनिज परिवहन और राजस्व नुकसान को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।