चंबल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन पर सख्त कार्रवाई, जलीय जीवों के संरक्षण को लेकर प्रशासन अलर्ट
राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित नेशनल चंबल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। चंबल नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
चंबल सेंचुरी क्षेत्र में अवैध रूप से बजरी खनन होने से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जलीय जीवों के आवास पर खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि नदी में रहने वाले दुर्लभ जीव-जंतुओं के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
नेशनल चंबल सेंचुरी देश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है। यहां कई लुप्तप्राय जलीय जीव पाए जाते हैं, जिनमें घड़ियाल, डॉल्फिन और विभिन्न प्रजातियों की मछलियां प्रमुख हैं। इनके संरक्षण के लिए चंबल नदी के प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
प्रशासन ने अवैध बजरी खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत नदी क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि सेंचुरी क्षेत्र में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की जाएगी, ताकि चंबल नदी और उसमें रहने वाले वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।
स्थानीय स्तर पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे सेंचुरी क्षेत्र के नियमों का पालन करें और अवैध खनन जैसी गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों की भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सफल बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि चंबल नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल और अन्य दुर्लभ जलीय जीवों के संरक्षण के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। अवैध बजरी खनन, नदी में होने वाली हलचल और प्रदूषण जैसी गतिविधियां इनके अस्तित्व के लिए खतरा मानी जाती हैं।
बूंदी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चंबल सेंचुरी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध खनन और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती से उम्मीद जताई जा रही है कि चंबल नदी का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और दुर्लभ जलीय जीवों का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सकेगा।
