चिकित्सा अधिकारियों की कमी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बढ़ी मरीजों की परेशानी
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 500 से 600 मरीज स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए आते हैं, जिससे यह अस्पताल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। लेकिन वर्तमान में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 12 चिकित्सा अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं और उनका पदस्थापन भी किया गया है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि कई चिकित्सा अधिकारी और नर्सिंग कर्मचारी प्रतिनियुक्ति के माध्यम से सुविधाजनक स्थानों पर तैनाती ले लेते हैं, जिससे मूल रूप से इस केंद्र पर स्टाफ की कमी उत्पन्न हो गई है।
चिकित्सा अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं और उपचार में देरी हो रही है। विशेषकर गंभीर मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वास्थ्य केंद्र उनके लिए प्राथमिक उपचार का मुख्य साधन है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें बार-बार परेशान होना पड़ता है। कई बार मरीजों को इलाज के लिए दूरस्थ जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। मूल पदस्थापित केंद्रों पर स्टाफ की कमी होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी चिकित्सा अधिकारियों और नर्सिंग स्टाफ को उनके मूल पदस्थापन स्थल पर ही तैनात रखा जाए, ताकि अस्पताल में सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था कर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
फिलहाल इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है।
