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Bundi गड्ढों में तब्दील हो रहा सेंट्रल बस स्टैंड, जिम्मेदारों ने किया नज़रअंदाज़
 

बूंदी न्यूज़ डेस्क, जयपुर से कोटा के बीच दर्जनों बस स्टैंडों में सबसे खराब स्थिति बूंदी के सेंट्रल बस स्टैंड की है। जनप्रतिनिधियों ने कई बार इसमें सुधार और सुविधाएं देने का वादा और आश्वासन दिया है, लेकिन यहां से जाने के बाद दोनों भूल जाते हैं। हालत यह है कि गड्ढों के कारण यात्रियों को लाने ले जाने के लिए कुछ बसें बस स्टैंड के बाहर से ही रवाना होने लगी हैं, वहीं जिम्मेदार लोग भी समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जानकारी के अनुसार बूंदी रोडवेज डिपो की 60 में से 48 बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं, इस बस स्टैंड पर प्रतिदिन राज्य सहित हरियाणा के विभिन्न डिपो की 200 से अधिक बसें चलती हैं। ऐसे में रोजाना करीब 7-8 हजार लोगों को बस स्टैंड पर आना-जाना पड़ता है। इस बस स्टैंड से शहर के पांच दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है, जबकि यहां बस स्टैंड पर उतरकर बदहाली व गड्ढों को देखकर यात्री वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को कोसते नजर आ रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि शहर के विकास का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि बस स्टैंड परिसर में बने एक फुट गहरे गड्ढों की भी अनदेखी कर रहे हैं।

शहर में औसतन एक हजार से अधिक विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। इनमें से कुछ इन नक्शों पर शहर की विरासत और खूबसूरती को देखकर रोडवेज से भी आते हैं, जो बस स्टैंड पर उतरकर खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। वहीं स्थानीय पर्यटक यहां के गड्ढों में कदम रखते ही जल्द ही बाहर निकल आता है। शहर के लोगों ने कई बार विधायक व मंत्रियों को बस स्टैंड की दुर्दशा से अवगत कराया. ऐसे में भाजपा सरकार में मंत्री रहे यूनुस खान और राज्य सरकार में परिवहन मंत्री रहे प्रताप सिंह ने खाचरियावास में सुविधाजनक बस स्टैंड का आश्वासन दिया. मंत्री खाचरियावास ने लोगों से यहां तक ​​कह दिया कि इस फोटो को संभाल कर रख लो, जल्द ही बस स्टैंड का कायाकल्प करवा देंगे, लेकिन नतीजा तीन पत्ती आच्छादन रहा. बस स्टैंड की दुर्दशा और गड्ढों को लेकर प्रशासन कई बार लिख चुका है। निगम को भी अवगत करा दिया गया है। जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि भामाशाह बस स्टैंड की दशा सुधारने और गड्ढों को भरने में सहयोग करें तो सभी यात्रियों को सुविधा मिल सकेगी।
रेणु देवड़ा, प्रबंधक, रोडवेज डिपो, बूंदी