कृषि विज्ञान केंद्र में उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
बूंदी जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देकर विक्रेताओं को अधिक सक्षम बनाना है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. महेश चौधरी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और किसानों को सही मार्गदर्शन देने की क्षमता विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि कृषि में लगातार नई तकनीकों का विकास हो रहा है, ऐसे में उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे सीधे किसानों से जुड़े होते हैं और उन्हें सही सलाह देने में अहम योगदान निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मृदा परीक्षण, उर्वरक प्रबंधन, जैविक खेती, फसल पोषण और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण से किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि प्रशिक्षित विक्रेता उन्हें सही और संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूक कर सकेंगे, जिससे फसल उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उर्वरक विक्रेता शामिल हुए और उन्होंने इसे उपयोगी बताते हुए कृषि क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 15 दिनों तक चलेगा और इसके सफल संचालन के लिए विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
