बीकानेर में खेजड़ी बचाने को जनआंदोलन तेज, तीसरे दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन अनशन
मरुस्थलीय क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा जनआंदोलन अब और तेज हो गया है। बिश्नोई धर्मशाला के सामने स्थित पब्लिक पार्क में चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में 450 से अधिक पर्यावरण प्रेमी, संत समाज के लोग और करीब 50 महिलाएं डटकर भाग ले रही हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खेजड़ी के पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। इसे रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
धरना स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। आंदोलनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पेड़ों की सुरक्षा की मांग उठाई। संतों और सामाजिक संगठनों ने भी मंच से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
बिश्नोई समाज, जो पेड़-पौधों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए जाना जाता है, इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल की संस्कृति और जीवन का आधार है। इसकी कटाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी आंदोलन को मजबूती दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाना जरूरी है। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक अनशन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर खेजड़ी की कटाई पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेने और समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
