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प्रदेश के हीमोफीलिया मरीजों के लिए राहत, नई दवा एमिसिजुमेब से कम हो जाएगा इंजेक्शन का बोझ

 
प्रदेश के हीमोफीलिया मरीजों के लिए राहत, नई दवा एमिसिजुमेब से कम हो जाएगा इंजेक्शन का बोझ

प्रदेश के हीमोफीलिया मरीजों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें रोजाना या बार-बार महंगे इंजेक्शन लगवाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। चिकित्सा विशेषज्ञों की हालिया रिसर्च में यह सामने आया है कि नॉन-फैक्टर दवा एमिसिजुमेब पहले की तुलना में कहीं अधिक असरदार है और मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें खून के थक्के बनने में समस्या आती है। इसके कारण मरीजों को छोटे-छोटे चोट लगने पर भी गंभीर रक्तस्राव का खतरा रहता है। परंपरागत उपचार में उन्हें नियमित रूप से महंगे फैक्टर इंजेक्शन लेने पड़ते थे, जो आर्थिक और शारीरिक दोनों रूप से मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण होते थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, एमिसिजुमेब नॉन-फैक्टर दवा है, जिसे शरीर में लंबे समय तक प्रभाव दिखाने के लिए विकसित किया गया है। इस दवा के प्रयोग से मरीजों को इंजेक्शन की संख्या और आवृत्ति में भारी कमी आएगी। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि दवा का असर लंबे समय तक रहता है और मरीजों में खून जमने की क्षमता में सुधार होता है।

एक चिकित्सा विशेषज्ञ ने बताया कि एमिसिजुमेब का लाभ केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और किशोर मरीजों के लिए भी यह सुरक्षित और प्रभावी साबित हो रही है। इससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा और वे अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को अधिक सहजता से कर पाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने भी इस दवा को राज्य में उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसे सरकारी अस्पतालों और विशेष हीमोफीलिया केंद्रों पर मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आर्थिक भार कम हो और ज्यादा से ज्यादा मरीज इसका लाभ उठा सकें।

मरीजों और उनके परिजनों ने इस नई दवा के आने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक लगातार इंजेक्शन लेने की चिंता और खर्च से मुक्ति मिलना उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आएगा।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मरीजों को दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए और नियमित चेकअप कराते रहना चाहिए। इससे दवा का असर और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

इस दवा के आने से हीमोफीलिया मरीजों के लिए राहत की नई किरण नजर आ रही है। एमिसिजुमेब न केवल उन्हें स्वास्थ्य की दृष्टि से मजबूत बनाएगी, बल्कि आर्थिक और मानसिक बोझ को भी कम करेगी। यह कदम प्रदेश में हीमोफीलिया मरीजों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।