बीकानेर में परंपरागत उल्लास के साथ मनी होली, ‘साले की होली’ का देर रात दहन
शहर में सोमवार को पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ होली का पर्व मनाया गया। अधिकांश मोहल्लों और चौकों में शाम के समय विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। श्रद्धालुओं ने होलिका की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
हालांकि बीकानेर की प्रसिद्ध ‘साले की होली’ का आयोजन देर रात हुआ। चौक क्षेत्र में स्थित इस विशेष होलिका का दहन परंपरा के अनुसार आधी रात के बाद किया गया। जैसे ही घड़ी ने एक बजने का संकेत दिया, ‘दुल्हे की छींकी’ (परिक्रमा) निकाली गई। यह अनूठी परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग देर रात तक चौक में जुटे रहे।
परकोटे में बसे पुराने शहर की गलियों में होली का रंग अलग ही नजर आया। होली के रसिये ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों के साथ देर रात तक झूमते रहे। कई स्थानों पर फाग गीत गाए गए और लोग गुलाल लगाकर आपसी भाईचारे का संदेश देते नजर आए।
‘साले की होली’ बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती है। इस आयोजन में स्थानीय परंपराओं और हास्य-व्यंग्य का विशेष रंग देखने को मिलता है। देर रात दहन और दुल्हे की प्रतीकात्मक परिक्रमा इस होली को अन्य स्थानों से अलग बनाती है।
होलिका दहन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
