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गोविंदसर पहुंची लोकमंथन दर्शन यात्रा, ढोल-घूमर और साफा पहनाकर ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

 
गोविंदसर पहुंची लोकमंथन दर्शन यात्रा, ढोल-घूमर और साफा पहनाकर ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

लोकमंथन-2026 के तहत निकाली जा रही लोकमंथन दर्शन यात्रा गुरुवार को राजस्थान के आदर्श गांव गोविंदसर पहुंची। यात्रा के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों ने राजस्थानी परंपरा और लोक संस्कृति के अनुरूप जोरदार स्वागत किया। ढोल की थाप, घूमर नृत्य, तिलक, साफा और फूलों की मालाओं से यात्रियों का अभिनंदन किया गया। पूरे गांव में इस दौरान उत्सव जैसा माहौल नजर आया।

करणी माता मंदिर में किए दर्शन

गोविंदसर पहुंचने के बाद यात्रा दल ने सबसे पहले करणी माता मंदिर में दर्शन किए। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीणों ने यात्रा में शामिल सदस्यों को गांव की परंपराओं और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।

ग्रामीणों की ओर से किए गए पारंपरिक स्वागत ने यात्रा के उद्देश्य को भी जीवंत कर दिया। लोकमंथन दर्शन यात्रा का उद्देश्य राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद लोक संस्कृति, परंपराओं, लोकज्ञान और सामाजिक जीवन को करीब से समझना और उन्हें व्यापक विमर्श से जोड़ना है।

बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी से कराया गांव का भ्रमण

करणी माता मंदिर में दर्शन के बाद यात्रा दल को बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी से गांव का भ्रमण कराया गया। इस दौरान यात्रियों ने गांव के पारंपरिक जीवन, ग्रामीण परिवेश और स्थानीय संस्कृति को करीब से देखा।

राजस्थान के ग्रामीण जीवन में बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी का विशेष महत्व रहा है। ऐसे पारंपरिक साधनों के जरिए यात्रा का गांव में भ्रमण कराना स्थानीय संस्कृति और विरासत से जुड़ाव का खास अनुभव रहा।

लोक संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का प्रयास

लोकमंथन दर्शन यात्रा राजस्थान के अलग-अलग अंचलों में पहुंचकर वहां की लोक कला, लोक परंपराओं, स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का प्रयास कर रही है। यात्रा की शुरुआत जयपुर से हुई थी और इसके माध्यम से प्रदेश के गांवों और विभिन्न अंचलों में रहने वाले लोक साधकों, कलाकारों और युवाओं से संवाद किया जा रहा है।

इससे पहले यात्रा के अन्य पड़ावों पर भी ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया है। डिडाणिया में कलश यात्रा के साथ स्वागत किया गया था, जबकि वहां लोकभजन, लोकनाट्य, पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम भी हुए थे।

दिसंबर में जयपुर में होगा लोकमंथन-2026

लोकमंथन-2026 का मुख्य आयोजन 4 से 6 दिसंबर 2026 तक जयपुर के जवाहर कला केंद्र में प्रस्तावित है। इस बार आयोजन का केंद्रीय विषय ‘हम भारत के लोग’ रखा गया है। लोक दर्शन यात्रा इसी व्यापक अभियान के तहत राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर लोकजीवन और सांस्कृतिक विविधता को समझने का प्रयास कर रही है।

गोविंदसर में हुआ पारंपरिक स्वागत भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की तस्वीर पेश करता है। ढोल, घूमर, साफा, तिलक, फूलों की माला और बैलगाड़ी-ऊंटगाड़ी जैसे स्थानीय रंगों ने यात्रा के इस पड़ाव को यादगार बना दिया।