बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा, बदलती जीवनशैली से मोटापा बढ़ रहा
नई दिल्ली – 5 से 10 साल के बच्चों का स्क्रीन टाइम पिछले कुछ वर्षों में बढ़कर चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले यह समय लगभग एक घंटे तक सीमित था, लेकिन अब औसत स्क्रीन टाइम बढ़कर 3 घंटे 30 मिनट तक पहुंच गया है। स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से बच्चों की शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है। खेलने, दौड़ने-भागने और अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम होने से बच्चों में मोटापे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डाइट और जीवनशैली में बदलाव भी इसका प्रमुख कारण हैं।
पेडियाट्रिक न्यूट्रीशन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का अधिक स्क्रीन टाइम केवल मोटापे ही नहीं बढ़ाता, बल्कि उनकी नींद, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार पर भी असर डालता है। उन्होंने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों के डिजिटल समय पर नियंत्रण रखें और उन्हें खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती जीवनशैली – जैसे बाहर खेलने की जगह वीडियो गेम और मोबाइल पर समय बिताना, उच्च कैलोरी वाले जंक फूड का सेवन, और असंतुलित आहार – बच्चों में मोटापे का एक प्रमुख कारण बन गई है। इसके अलावा, परिवारों में व्यस्त जीवन और डिजिटल उपकरणों की बढ़ती उपलब्धता भी इस समस्या को बढ़ा रही है।
एक हालिया सर्वे के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम तीन घंटे या उससे अधिक है, उनमें वजन बढ़ने और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अन्य बच्चों की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, आंखों की थकान, गर्दन और पीठ में दर्द जैसी समस्याएं भी आम हो रही हैं।
माता-पिता के लिए सलाह दी गई है कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उन्हें खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करें और स्क्रीन समय को नियंत्रित करें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि 5 से 10 साल के बच्चों के लिए दैनिक स्क्रीन टाइम दो घंटे से अधिक न हो और यह समय शिक्षा और आवश्यक जानकारी तक सीमित रखा जाए।
स्कूलों में भी बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। खेल, योग और व्यायाम जैसे कार्यक्रम बच्चों के मोटापे को कम करने और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक साबित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग और पेडियाट्रिक संगठनों ने अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की जीवनशैली पर नियंत्रण रखने और डिजिटल समय के सही उपयोग के लिए जागरूक किया है। उनका मानना है कि सही संतुलन और नियमित गतिविधियों से बच्चों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बनाए रखा जा सकता है।
बढ़ता स्क्रीन टाइम और बदलती जीवनशैली न केवल बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि भविष्य में उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भी संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता और समाज को मिलकर बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित और नियंत्रित उपयोग की आदत डालनी होगी।
