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सेशन शुरू होने के 5 महीने बाद मिलेंगे गेस्ट टीचर, दो महीने बाद हाफ इयरली एग्जाम; पढ़ाई पर पड़ सकता है असर

 
सेशन शुरू होने के 5 महीने बाद मिलेंगे गेस्ट टीचर, दो महीने बाद हाफ इयरली एग्जाम; पढ़ाई पर पड़ सकता है असर

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के कई महीने बाद गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति होने की स्थिति बन रही है। अगर प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो विद्यार्थियों को करीब पांच महीने बाद शिक्षक उपलब्ध हो पाएंगे। ऐसे में स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खास बात यह है कि गेस्ट टीचर्स के स्कूलों में पहुंचने के कुछ ही समय बाद हाफ इयरली परीक्षाएं भी शुरू हो जाएंगी।

शिक्षकों की कमी का असर पहले से ही कई सरकारी स्कूलों में देखने को मिल रहा है। अब गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति में देरी होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सेशन शुरू हुए कई महीने बीत चुके

नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों में नियमित शिक्षकों की कमी वाले विषयों में पढ़ाई का जिम्मा मौजूदा स्टाफ पर है। ऐसे में अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

गेस्ट टीचर की नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी के कारण स्कूलों को फिलहाल उपलब्ध शिक्षकों से ही काम चलाना पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं या विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

दो महीने बाद हाफ इयरली एग्जाम

सबसे बड़ी चिंता यह है कि गेस्ट टीचर्स के आने के कुछ समय बाद ही हाफ इयरली परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। यदि शिक्षक करीब पांच महीने बाद स्कूलों में पहुंचते हैं तो उनके पास विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा की तैयारी कराने के लिए बहुत कम समय बचेगा।

ऐसे में विद्यार्थियों के सामने परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम पूरा करने की चुनौती होगी। खासकर उन विषयों में समस्या अधिक हो सकती है, जिनमें लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली हैं।

फैकल्टी आने में लग सकता है एक महीना

गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन्हें स्कूलों में पहुंचने में समय लग सकता है। प्रक्रिया में चयन, दस्तावेजों का सत्यापन और स्कूल आवंटन जैसे चरण पूरे किए जाने होंगे।

इसके चलते नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी फैकल्टी के स्कूलों तक पहुंचने में करीब एक महीने का समय लगने की संभावना जताई जा रही है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान और बढ़ सकता है।

शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित

सरकारी स्कूलों में शिक्षक पद खाली होने की समस्या पहले से बनी हुई है। ऐसे में गेस्ट टीचर्स को समय पर नहीं लगाए जाने से स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का पूरा सत्र महत्वपूर्ण होता है। यदि शिक्षक सत्र के बीच में या परीक्षा से कुछ समय पहले आते हैं तो विद्यार्थियों को अपेक्षित शैक्षणिक लाभ नहीं मिल पाएगा।

अब नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी करता है। समय पर शिक्षक उपलब्ध होने से स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को संभालने में मदद मिल सकती है और विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले पर्याप्त तैयारी का मौका मिलेगा।