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आरजीएचएस में करोड़ों का फर्जीवाड़ा! फर्जी दस्तावेज और डॉक्टरों के नकली हस्ताक्षर से 5-7 करोड़ रुपये के क्लेम का आरोप

 
आरजीएचएस में करोड़ों का फर्जीवाड़ा! फर्जी दस्तावेज और डॉक्टरों के नकली हस्ताक्षर से 5-7 करोड़ रुपये के क्लेम का आरोप

राजस्थान की Rajasthan Government Health Scheme में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। अब तक निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों में अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन इस बार मामला एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़ी सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाएं संचालित करने वाली कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए उठाए गए करोड़ों के क्लेम

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनी पर मरीजों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर और डॉक्टरों के कथित फर्जी हस्ताक्षर एवं सील का इस्तेमाल कर आरजीएचएस के तहत 5 से 7 करोड़ रुपये तक के क्लेम उठाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मामला

बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच सेवाओं का संचालन कर रही थी। जांच के दौरान दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं और क्लेम प्रक्रिया में गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई।

डॉक्टरों के फर्जी साइन-सील का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि क्लेम हासिल करने के लिए डॉक्टरों के नाम से कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और सील का उपयोग किए जाने की बात सामने आई है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो इसे सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के रूप में देखा जाएगा।

जांच एजेंसियां जुटीं

स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों, क्लेम रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े आंकड़ों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल थे और यह गतिविधि कब से चल रही थी।

आरजीएचएस की पारदर्शिता पर सवाल

इस घटना ने आरजीएचएस जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाओं में डिजिटल सत्यापन और नियमित ऑडिट व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।

दोषियों पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

अधिकारियों का कहना है कि जांच में आरोप सिद्ध होने पर संबंधित कंपनी और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गलत तरीके से लिए गए क्लेम की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।