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बीकानेर में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज, खाजूवाला से अनूपगढ़ तक मंडियां बंद

 
बीकानेर में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज, खाजूवाला से अनूपगढ़ तक मंडियां बंद

बीकानेर क्षेत्र में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। किसान रबी फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध कराने और पानी के स्थायी रेगुलेशन की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों के आंदोलन को समर्थन देते हुए आज खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की सभी मंडियां बंद रहीं। मंडियां बंद रहने से क्षेत्र में कृषि कारोबार पर भी असर देखने को मिला।

किसानों का कहना है कि रबी की फसल के लिए सिंचाई पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हुआ तो गेहूं, चना, सरसों सहित अन्य फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी को लेकर किसान लंबे समय से स्थायी जल रेगुलेशन की मांग उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि हर सीजन में पानी को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती है, जिससे उन्हें खेती की योजना बनाने में परेशानी होती है।

आंदोलन के समर्थन में व्यापारियों और मंडी से जुड़े लोगों ने भी बाजार बंद रखकर किसानों का साथ दिया। खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की मंडियों में बंद का असर दिखाई दिया। कृषि उपज की खरीद-बिक्री प्रभावित होने के साथ मंडी गतिविधियां भी ठप रहीं।

किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी का मुद्दा केवल वर्तमान फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और किसानों की आय से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि पानी की उपलब्धता को लेकर स्थायी व्यवस्था होने से किसान पहले से अपनी फसल की योजना बना सकेंगे और बार-बार आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आंदोलन के दौरान किसानों ने सरकार से मांग की कि रबी सीजन के लिए सिंचाई पानी का स्पष्ट और स्थायी रेगुलेशन तय किया जाए। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है।

मंडी बंद रहने से स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ा है। कृषि मंडियों में रोजाना बड़ी मात्रा में फसल की खरीद-बिक्री होती है। ऐसे में बंद के कारण किसानों, व्यापारियों और मंडी से जुड़े अन्य लोगों की गतिविधियां प्रभावित हुईं।

फिलहाल किसानों के आंदोलन को लेकर क्षेत्र में प्रशासन और सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर है। किसान अपनी मांग पर कायम हैं और सिंचाई पानी की स्थायी व्यवस्था को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है