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बीकानेर में कचरा ट्रैक्टरों के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा: पवनपुरी में सड़क जाम, बदबू और गंदगी से परेशान रहवासी

 
बीकानेर में कचरा ट्रैक्टरों के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा: पवनपुरी में सड़क जाम, बदबू और गंदगी से परेशान रहवासी

राजस्थान के बीकानेर शहर के पवनपुरी क्षेत्र में गुरुवार सुबह नगर निगम के कचरा परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। क्षेत्रवासियों ने कचरा ढोने वाले ट्रैक्टरों की आवाजाही रोककर सड़क पर जाम लगा दिया और नगर निगम के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि शहरभर का कचरा लेकर गुजरने वाले ट्रैक्टर रोजाना पवनपुरी क्षेत्र से होकर निकलते हैं। इस दौरान कचरे से उठने वाली दुर्गंध और सड़क पर गिरने वाले कचरे के कारण आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। बदबू और गंदगी की वजह से क्षेत्र का वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका आरोप है कि निगम की अनदेखी के कारण उन्हें हर दिन गंदगी, बदबू और प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।

गुरुवार सुबह जब कचरा लेकर ट्रैक्टर क्षेत्र से गुजरने लगे तो लोगों ने उन्हें रोक दिया और सड़क पर धरना देकर विरोध शुरू कर दिया। सड़क जाम होने से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कचरा परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया जाए या फिर ट्रैक्टरों को पूरी तरह ढंककर ले जाया जाए, ताकि रास्ते में कचरा न गिरे और दुर्गंध से लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

नगर निगम अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद लोगों ने अपना विरोध समाप्त किया और ट्रैक्टरों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकी।

गौरतलब है कि बीकानेर में कचरा प्रबंधन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में पवनपुरी क्षेत्र में हुआ यह विरोध नगर निगम की कचरा परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब लोगों की नजर प्रशासन पर है कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालता है।