स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच बीकानेर की हकीकत: सीवरेज व्यवस्था ठप, लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
देश के सबसे प्रतिष्ठित स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत टीम जहां राजस्थान के Bikaner की गलियों और वार्डों में जमीनी स्थिति का आकलन कर रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की निगरानी के बावजूद कई इलाकों में सीवरेज व्यवस्था चरमराई हुई है और समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो रहा।
वार्डों में सीवरेज समस्या से परेशान लोग
शहर के कई क्षेत्रों, जिनमें वार्ड 42 और सुभाषपुरा जैसे इलाके भी शामिल बताए जा रहे हैं, में सीवरेज लाइनें जाम होने और गंदा पानी सड़कों पर बहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे स्थानीय निवासियों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छता दावों पर उठ रहे सवाल
एक ओर स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए शहर की सफाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सीवरेज जैसी बुनियादी समस्या ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सीवरेज व्यवस्था लंबे समय तक बाधित रहती है तो स्वच्छता संबंधी प्रयासों का प्रभाव भी कम हो जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी खतरे की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, सीवरेज व्यवस्था ठप होने से गंदगी और जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी और बरसात के मौसम में ऐसी समस्याएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभागों और नगर निगम से सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल सर्वेक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय पूरे वर्ष बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने की जरूरत है।
निगम की कार्यप्रणाली पर चर्चा
शहर में सीवरेज संकट को लेकर नगर निगम की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों का मानना है कि नियमित रखरखाव और शिकायतों के त्वरित निस्तारण से ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।
