1971 युद्ध के वीर योद्धा ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ का निधन, देश ने खोया एक बहादुर सैनिक
1971 के भारत-पाक युद्ध में साहस और शौर्य की मिसाल पेश करने वाले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ (87) का मंगलवार को उनके निवास पर निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर से सैन्य जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
ब्रिगेडियर राठौड़ ने 1971 के युद्ध के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सीमा में लगभग 16 किलोमीटर तक घुसकर रानीहल चेकपोस्ट पर तिरंगा फहराया था। उनका यह साहसिक कदम भारतीय सेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज है और आज भी इसे गर्व और सम्मान के साथ याद किया जाता है।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और हमेशा अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति को सर्वोपरि रखा। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहे।
उनके निधन के बाद परिजनों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
Brigadier Jagmal Singh Rathore का जीवन भारतीय सेना के उन जांबाज अफसरों का प्रतीक माना जाता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना दुश्मन के क्षेत्र में भी बहादुरी से मोर्चा संभाला। 1971 के युद्ध में उनका योगदान भारतीय सैन्य इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे बेहद सरल, अनुशासित और देशभक्त स्वभाव के व्यक्ति थे। अपने पूरे जीवन में उन्होंने युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित किया और कई अवसरों पर सैन्य अनुभव साझा कर उनका मार्गदर्शन किया।
उनके निधन से न केवल सैन्य समुदाय बल्कि पूरा क्षेत्र शोकाकुल है। लोगों ने उन्हें एक सच्चा देशभक्त और वीर सैनिक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
देश ने आज एक ऐसे वीर सपूत को खो दिया है, जिसकी बहादुरी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
