भीलवाड़ा में ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन, रिलीज रोकने की मांग
फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के रिलीज से एक दिन पहले गुरुवार को शहर में विवाद और प्रदर्शन देखने को मिला। यादव (अहीर) समाज के लोगों ने फिल्म के पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया और फिल्म की रिलीज रोकने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि फिल्म के टाइटल से समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं। उनका आरोप है कि फिल्म का नाम और कथानक समाज की परंपराओं और सम्मान के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने मीडिया और प्रशासन से अपील की कि फिल्म को सांस्कृतिक और सामाजिक भावनाओं का सम्मान करते हुए रिलीज से रोका जाए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह फिल्म हाल ही में चर्चा में आई थी और इसके प्रचार के दौरान पोस्टर और टीज़र के माध्यम से समाज के प्रति अनुचित संदेश जाने का डर जताया गया। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और उन्होंने नारेबाजी और हाथ में प्लैकार्ड लेकर अपनी मांग स्पष्ट की।
पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बनाए रखी और शहर में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी। अधिकारीयों ने कहा कि फिलहाल कोई हिंसक घटना नहीं हुई और सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से समाप्त हुआ।
फिल्म निर्माता और वितरक की ओर से अभी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन फिल्म के प्रचारक इस विवाद को देखते हुए संभावित समीक्षा और संवाद की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समाज विशेष के नाम और भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर सेंसिटिविटी बनाए रखना जरूरी है। फिल्मों और मीडिया सामग्री के रिलीज़ के समय यह आवश्यक है कि सांस्कृतिक भावनाओं और संवेदनाओं का ध्यान रखा जाए, ताकि किसी समाज की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
कुल मिलाकर, भीलवाड़ा में ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म के विरोध में हुए प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि सामाजिक भावनाओं का सम्मान और संवेदनशीलता फिल्म उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अपील की है कि वे उनकी मांग पर सकारात्मक कार्रवाई करें, जबकि फिल्म के निर्माताओं और वितरकों के लिए यह चुनौती है कि वे विवाद के बावजूद अपनी फिल्म के विषय और संदेश को सही रूप में प्रस्तुत करें।
यह घटना राजस्थान में सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता को भी उजागर करती है और यह दर्शाती है कि फिल्म या मीडिया सामग्री के माध्यम से किसी समाज के सम्मान को ठेस न पहुँचाने की जिम्मेदारी सभी निर्माताओं पर है।
