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धनतेरस पर कोटड़ी श्याम मंदिर में प्रज्वलित हुआ विशेष दीपक, मिट्टी और गोबर से किया तैयार; वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई पूजा

 
धनतेरस पर कोटड़ी श्याम मंदिर में प्रज्वलित हुआ विशेष दीपक, मिट्टी और गोबर से किया तैयार; वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई पूजा

राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कोटड़ी श्याम मंदिर में धनतेरस के अवसर पर विशेष दीपक प्रज्वलित किया गया। मिट्टी और गोबर से तैयार इस दीपक को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से जलाया गया। धनतेरस के पावन अवसर पर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

धनतेरस का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही घरों और मंदिरों में दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसी परंपरा के तहत कोटड़ी श्याम मंदिर में भी विशेष दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मिट्टी और गोबर से तैयार किया गया दीपक

मंदिर में प्रज्वलित किया गया विशेष दीपक मिट्टी और गोबर से बनाया गया था। पारंपरिक सामग्री से तैयार इस दीपक को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष महत्व दिया गया। दीपक जलाने से पहले वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

मंत्रोच्चार के बीच दीपक प्रज्वलित होते ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। इस धार्मिक आयोजन में मंदिर से जुड़े लोगों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ धार्मिक अनुष्ठान

धनतेरस के अवसर पर मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ विशेष दीपक जलाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान कोटड़ी श्याम के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में दीपावली के त्योहार को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीप प्रज्वलित करना अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के पांच दिवसीय पर्व में धनतेरस से ही दीपदान और पूजा-अर्चना का विशेष क्रम शुरू हो जाता है।

मेवाड़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है कोटड़ी श्याम मंदिर

कोटड़ी श्याम मंदिर मेवाड़ क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आयोजन किए जाते हैं। धनतेरस पर विशेष दीपक प्रज्वलित करने का आयोजन भी इसी धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ा रहा।

मिट्टी और गोबर से बने दीपक का इस्तेमाल भारतीय परंपरा में लंबे समय से होता आया है। ऐसे दीपक प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं और धार्मिक आयोजनों में इनका विशेष स्थान है।

धनतेरस पर कोटड़ी श्याम मंदिर में हुए इस आयोजन ने श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल बना दिया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रज्वलित दीपक ने दीपावली के पर्व की शुरुआत को और खास बना दिया।