भीलवाड़ा में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, श्रद्धा और भक्ति में डूबा शहर; हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
ओडिशा के पुरीधाम की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा गुरुवार को राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में भी पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निभाई गई। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ में विराजमान होने के साथ ही शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया। इस अवसर पर भीलवाड़ा में भगवान जगन्नाथ की दो अलग-अलग रथयात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
कावांखेड़ा स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाम करीब 4 बजे भगवान जगन्नाथ की 24वीं रथयात्रा धूमधाम के साथ शुरू हुई। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना की।
रथयात्रा के मार्ग को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक धुनों के बीच निकली यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। कई स्थानों पर भक्तों के लिए प्रसाद और जल सेवा की व्यवस्था भी की गई।
रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमाएं विशेष रूप से सुसज्जित रथ में विराजमान थीं। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर खड़े नजर आए। लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान से आशीर्वाद मांगा और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।
आयोजकों के अनुसार, भीलवाड़ा में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। हर वर्ष इस आयोजन में भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। रथयात्रा को लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह देखने को मिलता है और लोग पूरे साल इस धार्मिक आयोजन का इंतजार करते हैं।
शहर में निकली दूसरी रथयात्रा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दोनों यात्राओं के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान अपने मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देने आते हैं। इसी भावना के साथ श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ रथयात्रा में शामिल होते हैं।
भीलवाड़ा में निकली यह भव्य रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बनी। पूरे शहर में दिनभर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
