राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मालासेरी डूंगरी में किए दर्शन, सवाई भोज मंदिर में की पूजा; 1115वें अवतरण दिवस समारोह में हुए शामिल
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत दो दिवसीय भीलवाड़ा दौरे पर हैं। दौरे के दौरान उन्होंने आसींद क्षेत्र स्थित मालासेरी डूंगरी पहुंचकर सवाई भोज मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। राज्यपाल यहां भगवान देवनारायण के 1115वें अवतरण दिवस समारोह में भी शामिल हुए। उनके दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं।
राज्यपाल गहलोत 16 और 17 सितंबर को भीलवाड़ा जिले के दौरे पर हैं। इसी दौरान वे मालासेरी डूंगरी पहुंचे, जहां धार्मिक आयोजन में शामिल होकर उन्होंने पूजा-अर्चना की। मालासेरी डूंगरी भगवान देवनारायण से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है और यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सवाई भोज मंदिर में की पूजा-अर्चना
मालासेरी डूंगरी पहुंचने के बाद राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सवाई भोज मंदिर में दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही।राज्यपाल के कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। उनके दौरे के दौरान स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां की गईं।
1115वें अवतरण दिवस समारोह में हुए शामिल
राज्यपाल गहलोत भगवान देवनारायण के 1115वें अवतरण दिवस समारोह में भी शामिल हुए। मालासेरी डूंगरी में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा।भगवान देवनारायण राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में माने जाते हैं और उनके अनुयायी राजस्थान के साथ-साथ आसपास के राज्यों में भी हैं। मालासेरी डूंगरी से भगवान देवनारायण की धार्मिक परंपरा का विशेष जुड़ाव माना जाता है।
दो दिवसीय दौरे पर हैं राज्यपाल
राज्यपाल थावरचंद गहलोत का भीलवाड़ा दौरा दो दिनों का है। इस दौरान उनके कई कार्यक्रम निर्धारित हैं। मालासेरी डूंगरी और सवाई भोज मंदिर के कार्यक्रम के अलावा भी दौरे में विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं।राज्यपाल के आगमन को लेकर स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के इंतजाम किए। मालासेरी डूंगरी में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्यपाल के इस दौरे के दौरान धार्मिक आयोजन में उनकी भागीदारी प्रमुख आकर्षण रही।
