भीलवाड़ा में साइबर ठगों का ‘डिजिटल अरेस्ट’ जाल: 80 साल के बुजुर्ग दंपती को 7 दिन तक डराकर किया मानसिक शोषण
जिले में साइबर ठगों की नई चाल का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 80 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को सात दिन तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। खुद को टेलीकॉम विभाग, मुंबई पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर आरोपियों ने दंपती को लगातार फोन कॉल किए और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर दबाव बनाया।
जानकारी के अनुसार, ठगों ने बुजुर्ग दंपती को अलग-अलग नंबरों से कुल 36 कॉल किए। हर कॉल में खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए कहा गया कि उनके मोबाइल नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ 17 मामले दर्ज हैं और जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।
आरोपियों ने दंपती को वीडियो कॉल पर ‘पूछताछ’ के नाम पर घंटों लाइन पर बनाए रखा। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने और किसी से बात न करने की हिदायत दी गई। इस पूरे घटनाक्रम को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम दिया, जिससे बुजुर्ग दंपती डर के साए में जीने को मजबूर हो गए।
ठगों ने जेल भेजने और संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर उन्हें मानसिक रूप से इतना भयभीत कर दिया कि वे लगातार तनाव में रहे। परिजनों को जब इस बारे में जानकारी मिली, तब जाकर पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे या निजी जानकारी हासिल करते हैं। असल में किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की जाती।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें।
इस घटना ने बुजुर्गों की सुरक्षा और साइबर जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
