Aapka Rajasthan

भीलवाड़ा की बेटी ने रेसलिंग मैट पर लहराया भारत का परचम, कजाकिस्तान की चैंपियन को हराकर जीता तीसरा गोल्ड

 
भीलवाड़ा की बेटी ने रेसलिंग मैट पर लहराया भारत का परचम, कजाकिस्तान की चैंपियन को हराकर जीता तीसरा गोल्ड

भीलवाड़ा के एक मजदूर की बेटी ने राजस्थान के साथ-साथ देश का भी मान बढ़ाया है। अश्विनी बिश्नोई ने महज एक महीने में तीसरा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने ग्रीस के एथेंस में चल रही विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। अश्विनी बिश्नोई ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में कजाकिस्तान की एक प्रसिद्ध पहलवान को हराया। इस कुश्ती चैंपियनशिप में भीलवाड़ा की दो महिला पहलवान भारतीय टीम में शामिल हैं। अश्विनी बिश्नोई के अलावा, कशिश गुर्जर भी इस समय भारतीय टीम का हिस्सा हैं। कशिश गुर्जर का मुकाबला अभी होना बाकी है।

इससे पहले 1 जुलाई को अश्विनी ने वियतनाम में आयोजित अंडर-17 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। उसके दो दिन बाद, अश्विनी बिश्नोई ने एशियाई बीच कुश्ती चैंपियनशिप में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ महिला पहलवानों को हराया था। अब एक बार फिर उन्होंने पदक जीतकर भारत का परचम लहराया है।

अश्विनी बिश्नोई ने जीते चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट

भीलवाड़ा की उभरती पहलवान अश्विनी बिश्नोई का अंतरराष्ट्रीय करियर स्वर्णिम सफलताओं से भरा है। अश्विनी बिश्नोई ने पिछले 3 वर्षों में लगातार चार अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चैंपियनशिप के खिताबी मुकाबले के साथ-साथ पहले 5 मुकाबलों में भी उन्होंने किसी भी प्रतिद्वंद्वी पहलवान को अपने खिलाफ एक भी अंक हासिल नहीं करने दिया।

राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि अध्यक्ष बनने पर राजस्थान को कुश्ती में अग्रणी बनाने का जो वादा किया था, वह अब मूर्त रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह तो शुरुआत है, अब राजस्थान के पहलवान हर प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन करेंगे। राजीव दत्ता ने कहा कि राजस्थान के पदक विजेता पहलवानों का भारत लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इन खिलाड़ियों को आगे की तैयारियों के लिए हर आवश्यक सुविधा, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे। एथेंस में भारत की बेटियों की यह सफलता देश की युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा और राजस्थान के लिए गौरव का क्षण है।