नदबई में दादी प्रकाशमणि का 19वां स्मृति दिवस विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया
भरतपुर जिले के नदबई स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र में संस्था की मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी का 19वां स्मृति दिवस श्रद्धा और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम को विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में आयोजित किया गया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों और भाई-बहनों ने दादी प्रकाशमणि के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दादी प्रकाशमणि जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। सेवा केंद्र परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संस्था से जुड़े लोगों ने दादी प्रकाशमणि के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
दादी प्रकाशमणि के जीवन को किया याद
कार्यक्रम में वक्ताओं ने दादी प्रकाशमणि जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन मानवता की सेवा, आध्यात्मिक जागृति और विश्व बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने लोगों को सकारात्मक सोच, आत्मिक शांति और आपसी प्रेम का संदेश दिया।
वक्ताओं ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी का जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का उदाहरण रहा। उनके विचार आज भी संस्था से जुड़े लोगों और समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने हमेशा मनुष्य को जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान रखने की प्रेरणा दी।
विश्व बंधुत्व का दिया संदेश
स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विश्व बंधुत्व की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए आपसी भाईचारा बेहद जरूरी है। आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कुछ समय ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन भी किया। सेवा केंद्र परिसर में शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि
स्मृति दिवस के मौके पर बड़ी संख्या में संस्था से जुड़े लोग और श्रद्धालु सेवा केंद्र पहुंचे। सभी ने दादी प्रकाशमणि जी को श्रद्धापूर्वक याद किया और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की बात कही।
कार्यक्रम का समापन विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना के साथ किया गया। सेवा केंद्र की ओर से उपस्थित लोगों को दादी प्रकाशमणि जी के संदेशों और आध्यात्मिक शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
