भरतपुर के RPF कॉन्स्टेबल लोकेश कुमार का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचा तो मचा कोहराम
भरतपुर के जिरौली गांव निवासी RPF कॉन्स्टेबल लोकेश कुमार का बुधवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। शव को देखते ही परिजन बिलख पड़े। गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। हर तरफ लोकेश के जाने का गम दिखाई दे रहा था।
अंतिम संस्कार से पहले रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने लोकेश कुमार को श्रद्धांजलि दी। अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें सलाम किया। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचा
लोकेश कुमार का शव जब तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव जिरौली पहुंचा तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। जैसे ही परिवार के लोगों ने पार्थिव शरीर देखा, उनका धैर्य जवाब दे गया। परिजन रोते-बिलखते रहे। परिवार के सदस्यों का दुख देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
ग्रामीणों ने बताया कि लोकेश मिलनसार स्वभाव के थे और गांव के लोगों के बीच उनकी अच्छी पहचान थी। उनके निधन की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
RPF अधिकारियों ने दी अंतिम सलामी
अंतिम संस्कार से पहले RPF अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ लोकेश कुमार को श्रद्धांजलि दी। पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किया गया। अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलामी देकर उनके सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा को याद किया।
RPF कॉन्स्टेबल के अंतिम संस्कार के दौरान गांव में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। हर किसी की जुबां पर लोकेश की यादें थीं। परिजन अपने बेटे और परिवार के सदस्य को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हो गए।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
लोकेश कुमार के निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिन परिजनों को अपने बेटे के घर लौटने का इंतजार था, उन्हें उसका पार्थिव शरीर मिला। तिरंगे में लिपटे शव को देखकर परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
ग्रामीणों ने भी परिवार को ढांढस बंधाया और इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। अंतिम संस्कार के दौरान पूरा गांव शोक में डूबा रहा।
लोकेश कुमार ने RPF में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई। उनके अंतिम संस्कार में जिस तरह RPF अधिकारियों और ग्रामीणों ने सम्मान के साथ विदाई दी, वह उनके प्रति लोगों के सम्मान को दर्शाता है। तिरंगे में लिपटे लोकेश के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देते समय हर आंख नम थी और गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया।
