भरतपुर मेयर की कुर्सी के लिए भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों के नाम चर्चा में, बिजनेसमैन की पत्नियों से लेकर पूर्व डिप्टी मेयर के परिवार तक दावेदार
भरतपुर नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। आगामी निकाय चुनाव से पहले मेयर पद के संभावित दावेदारों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मेयर पद की रेस में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों के नाम भी सामने आ रहे हैं। इसके अलावा शहर के कुछ बड़े कारोबारियों की पत्नियों और पूर्व डिप्टी मेयर के परिवार से जुड़े नामों की भी चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो रही है।
नगर निगम में मेयर पद को लेकर दोनों दलों के नेता अपने-अपने स्तर पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन कर रहे हैं। हालांकि, अभी किसी भी पार्टी ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। ऐसे में अलग-अलग दावेदारों के नाम सामने आने के साथ राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
भाजपा खेमे में संगठन से जुड़े प्रमुख चेहरों के अलावा स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेताओं के नामों पर चर्चा चल रही है। पार्टी के जिलाध्यक्ष का नाम भी मेयर पद की संभावित दौड़ में बताया जा रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी जिलाध्यक्ष का नाम चर्चा में होने की बात कही जा रही है। दोनों दलों के जिलाध्यक्ष यदि चुनावी मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
मेयर पद की दावेदारी में केवल राजनीतिक परिवारों के नाम ही शामिल नहीं हैं। शहर के कुछ प्रमुख बिजनेसमैन की पत्नियों के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि दोनों प्रमुख दल ऐसे चेहरों पर भी विचार कर सकते हैं, जिनकी शहर में सामाजिक पकड़ और जनसंपर्क मजबूत हो।
इसके अलावा पूर्व डिप्टी मेयर के परिवार से जुड़े नाम को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय इस परिवार का नगर निगम और शहर की राजनीति से पुराना जुड़ाव माना जाता है। ऐसे में परिवार से किसी सदस्य को मेयर पद के लिए आगे बढ़ाए जाने की संभावना को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।
भरतपुर में मेयर पद का चुनाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाता हैं और शहर की स्थानीय समस्याएं चुनावी मुद्दों में अहम भूमिका निभा सकती हैं। सड़क, सफाई, जल निकासी, पेयजल, यातायात और विकास कार्यों जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
आगामी निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज होने की संभावना है। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले भी किए जा रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों ने भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और जीतने योग्य उम्मीदवार का चयन करना होगी। मेयर पद की दावेदारी में कई नाम होने के कारण टिकट वितरण से पहले पार्टी स्तर पर सर्वे और स्थानीय नेताओं से राय लेने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल मेयर पद के लिए सामने आ रहे नामों को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। राजनीतिक दलों की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चुनावी मैदान में कौन-कौन से चेहरे उतरेंगे। लेकिन इससे पहले संभावित दावेदारों के नामों ने भरतपुर की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
अब आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस की बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रहेगी। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख और प्रक्रिया स्पष्ट होगी, मेयर पद की रेस में शामिल दावेदारों की तस्वीर भी साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल जिलाध्यक्षों, कारोबारी परिवारों और पूर्व डिप्टी मेयर के परिवार से जुड़े नामों की चर्चा ने भरतपुर के सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।
