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भरतपुर अंचल की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगा नया स्वरूप, पर्यटकों के लिए खुलेंगी विरासत की नई राहें

 
भरतपुर अंचल की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगा नया स्वरूप, पर्यटकों के लिए खुलेंगी विरासत की नई राहें

भरतपुर जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत आने वाले समय में पर्यटकों को और भी करीब से देखने को मिलेगी। सदियों की ऐतिहासिक धरोहर समेटे वैर किला, अजेय लोहागढ़ दुर्ग स्थित किशोरी महल, शाही ठाठ-बाट के लिए प्रसिद्ध डीग और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र धौलपुर का मचकुंड—इन चारों स्थलों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके जरिए न सिर्फ राजस्थान की गौरवशाली विरासत को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।

वैर किला, जो अपनी मजबूत संरचना और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। अब इसे पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की योजना बनाई जा रही है। किले के भीतर मौजूद प्राचीन स्थापत्य, दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियां और इतिहास से जुड़े किस्से पर्यटकों को उस दौर में ले जाएंगे, जब यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता था।

इसी तरह भरतपुर के अजेय लोहागढ़ किले में स्थित किशोरी महल को भी पर्यटन की दृष्टि से संवारा जाएगा। लोहागढ़ किला अपने अभेद्य स्वरूप के लिए जाना जाता है, जिसने कई आक्रमणों को झेला, लेकिन कभी पूरी तरह पराजित नहीं हुआ। किशोरी महल की ऐतिहासिक और वास्तुकला से जुड़ी विशेषताओं को संरक्षित कर यहां लाइट एंड साउंड शो, गाइडेड टूर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना पर विचार किया जा रहा है।

डीग, जो कभी भरतपुर रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा, अपने भव्य महलों, बागों और जल संरचनाओं के लिए विश्वविख्यात है। डीग के महल शाही ठाठ-बाट और राजसी जीवनशैली की झलक पेश करते हैं। यहां के फव्वारे, रंगमहल और गोपाल भवन जैसे स्थल पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं। आने वाले समय में डीग को हेरिटेज टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले सैलानी इसकी भव्यता को नजदीक से महसूस कर सकें।

धौलपुर का मचकुंड धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं से जुड़े मचकुंड को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना है। घाटों का सौंदर्यीकरण, सुविधाओं का विस्तार और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की जाएंगी, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिल सके।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन चारों स्थलों को एक हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावना पर भी काम किया जा रहा है। इससे पर्यटकों को एक ही यात्रा में इतिहास, संस्कृति, शाही वैभव और धार्मिक आस्था का अनुभव मिल सकेगा। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।