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रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को 165 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा, ATS और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर 66 लाख वसूले

 
रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को 165 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा, ATS और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर 66 लाख वसूले

साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को 165 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों ने अधिकारी को फर्जी जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए कभी ATS तो कभी सुप्रीम कोर्ट के नाम का इस्तेमाल किया। लगातार धमकियों और दबाव के बीच आरोपियों ने उनसे करीब 66 लाख रुपये ऐंठ लिए। मामले की जांच कर रही पुलिस ने उत्तर प्रदेश से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, ठगों ने रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर खुद को जांच एजेंसी और कानून से जुड़े अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि उनका नाम किसी गंभीर मामले में सामने आया है। इसके बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाना शुरू कर दिया। अधिकारी को विश्वास में लेने के लिए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और अधिकारियों की पहचान का सहारा लिया।

ठगों ने अधिकारी को बताया कि मामले की जांच ATS के स्तर पर चल रही है और यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के नाम का भी इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने अधिकारी को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने दिया। इस तरह उन्हें लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया।

आरोपियों ने जांच के नाम पर अधिकारी के बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद अलग-अलग कारण बताकर रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया गया। डर के कारण अधिकारी आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे। करीब 165 दिनों के दौरान उनसे लगभग 66 लाख रुपये की रकम ठग ली गई।

लगातार आर्थिक नुकसान होने और ठगों के दबाव से परेशान होने के बाद अधिकारी को मामले में संदेह हुआ। उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस और ATS ने मामले की जांच शुरू की। जांच में आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े सुराग खंगाले गए।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के उत्तर प्रदेश में होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को यूपी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है और गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि आरोपी इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बना चुके हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के वीडियो कॉल या फोन पर खुद को पुलिस, ATS, CBI, ED या सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर धमकाने पर घबराएं नहीं। किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस तरह लंबे समय तक वीडियो कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया नहीं होती। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटकर साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत करनी चाहिए।